महाराष्ट्र में राजनैतिक ड्रामाबाजी आज भी जारी रही। शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस गठबंधन ने अपने साथ 162 विधायकों के होने का दावा करते हुए प्रदेश के राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी से मुलाकात की। शिवसेना के नेता एकनाथ शिंदे ने बताया की उन्होंने विधायकों के हस्ताक्षर के साथ पत्र राज्यपाल को सौंप दिया है।

शिंदे ने कहा की मौजूदा फडणवीस सरकार अल्पमत की सरकार है और उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। लोकतंत्र में बहुमत प्राप्त सरकार ही सत्ता में रह सकती है। उससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अलग अलग दाखिल की गयी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सभी दलों की दलीलें सुनने के बाद फैसला कल सुबह 10 बजे तक के लिए सुरक्षित कर लिया।

सुप्रीम कोर्ट में राज्यपाल द्वारा बीजेपी को आमंत्रित करने की प्रक्रिया को असंवैधानिक घोषित करने और मौजूदा फडणवीस सरकार को तुरंत ही बहुमत साबित करने का आदेश जारी करने से सम्बंधित याचिका दाखिल की गयी है। हाल फिलहाल में कई सारे ऐसे उदहारण भारतीय राजनीति में देखने को मिले है जिससे ये पता चलता है की सभी राजनीतिक पार्टियां विचारधारा की राजनीति का त्याग कर चुकी है और सत्ता प्राप्ति एक मात्र उद्देश्य की पूर्ति में साम दाम दंड भेद जैसे सभी नीतियों के साथ लगे हुए है ।

कर्नाटक, गोवा, हरियाणा और अब मध्य प्रदेश सभी जगह सभी दल जोड़ तोड़ में लगे हुए थे। जिसको जिसके साथ मौका मिला, गठबंधन के बाद सत्ता पर आसीन हो गया। एक समय शिवसेना को कट्टर हिंदूवादी छवि की वजह से जाना जाता था। संजय राउत मुस्लिम समाज के लोगों के मताधिकार तक ख़त्म करने की बात करते थे। आज यही शिवसेना अपनी छवि के ठीक विपरीत कांग्रेस से हाथ मिलाने के लिए तैयार है और सत्ता पर काबिज होने के पूरे प्रयास में जोर शोर से लगी हुए है।

दूसरी तरफ बीजेपी है जिसने भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अजीत पवार से हाथ मिलाने में देरी नहीं की। ये वही अजीत पवार है जिन्होंने ने राज्य में सूखा पड़ जाने पर सिचाई के लिए पानी न होने पर मूत देने की बातें करते थे। मौजूदा समय में विचारधारा की लड़ाई पूरी तरह से खत्म हो चुकी है।