विंग कमांडर अभिनंदन कल वापस भारत आ गए.भारत पाकिस्तान के बीच बहुत ज्यादा तनाव के हालात भी खत्म हो गए.हालांकि सीमा पर पाकिस्तान ने संघर्ष विराम का उल्लंघन जारी रखा है.जम्मू कश्मीर के हंदवाड़ा में भी 5 जवान आंतकियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हो गए.इस सबके बीच जब तूफान फिलहाल हल्का ही हो रहा है तो एक नजर हिंदुस्तान की सियासत पर भी डाल लेते हैं.ऐसे वक्त में जब सीमा पर जवान अपनी जान हथेली पर लिए पाकिस्तान से लड़ रहे थे या लड़ने वाले थे तो ये नेता उनकी वीरता को किस तरह अपने सियासत के तेल में भून रहे थे.

शुरुआत बड़ी पार्टी से ही की जाए.कांग्रेस समेत 21 दलों ने इस बीच संसद में बैठक की.बैठक करके कहा गया की देश के वीर जवानों के बलिदान का बीजेपी राजनीतिकरण कर रही है.दरअसल एयर स्ट्राइक के बाद पीएम ने चुरु में रैली की.उन्होंने वहां अपनी 2014 की कविता भी पढ़ी.हालांकि उसमें क्रेडिट लेने जैसा कुछ नहीं दिखता.पाकिस्तान को सबक सिखाने का वादा पीएम ने चुनाव में किया था.उस दिन पीएम ने पाकिस्तान के मुद्दे पर कांग्रेस को भी कुछ नहीं कहा.अगर कहा भी था तो जिम्मेदार दल होने के नाते क्या कांग्रेस और इसके साथियों को सब्र नहीं करना चाहिए था? इन मुद्दों पर चर्चा तो बाद में भी हो सकती थी.इसके बावजूद विपक्षी दलों ने इस तरह का प्रस्ताव बनाया और मीडिया में आकर इसकी चर्चा की.इनकी हरकत का असर ये हुआ की पाकिस्तान की संसद में रेल मंत्री ने इनकी शान में कसीदे पढ़े और बताया की किस तरह से चुनाव की वजह से बीजेपी सरकार पाकिस्तान से युद्ध करना चाहती है.

इसके बाद अरविंद केजरीवाल का रूख करते हैं.आदरणीय केजरीवाल ने पाकिस्तान के साथ तनाव के चलते अपना आमरण अनशन रद्द कर दिया था.इन्हीं केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा में आरोप लगाया की पीएम मोदी चुनाव के चलते न जाने कितने जवानों की शहादत रहे हैं.आगे भी न जाने कितने जवानों की शहादत भी वो देंगे.केजरीवाल जी का भाषण पाकिस्तान मीडिया में भारत की आलोचना करने के लिए खूब चलाया गया.आने वाले दिनों में जब केजरीवाल जनता के बीच वोट मांगने जाएं तो इनसे इस बात का हिसाब लेने में जनता तो कोई भूल नहीं करनी चाहिए.

विपक्ष की तरफ से लगातार खुद को पीएम का उम्मीदवार बनाने का प्रयास करती ममता बनर्जी भी पीछे नहीं रहीं.उन्होंने पाकिस्तान में एयरस्ट्राइक के लिए वायुसेना पर ही सवाल उठा दिया.उन्होंने सीधा तौर पर वायुसेना से एयरस्ट्राइक के सबूत मांग लिए.इनका कहना था की सबूत दिया जाए वर्ना पता ही नहीं चलेगा की आखिर पाकिस्तान में हुआ क्या था.

अब इन सबके बाद आते हैं सत्ताधारी दल बीजेपी पर.बीजेपी के नंबर आखिरी इसलिए है क्योंकि अगर उसे इन सब पर सवाल खड़े करना है तो सबसे पहले उसे बीएस येदुरप्पा की आलोचना करनी चाहिए.पाकिस्तान से तनाव के बीच बीएस येदुरप्पा ये बताने में जुटे थे की एयर स्ट्राइक से बीजेपी को कितना फायदा मिला है.उन्होंने आगामी कर्नाटक चुनावों के बारे में बात करते हुए बताया की किस तरह अब बीजेपी 28 में 22 सीटें जीत सकती है.कर्नाटक के सीएम रह चुके येदुरप्पा जैसे नेता अगर भारत में हैं तो भला दुश्मनों की जरूरत ही क्या है.

ये हाल है हमारे परिपक्व लोकतंत्र के नेताओं का.इनके बारे में पढ़िए और जब ये वोट मांगने आपके दरवाजे पर आएं तो उल्टे पैर ऐसा दौड़ाइए की हमेशा याद रखा जाए.