भारतीय सेना द्वारा की गयी बड़ी कार्यवाही के बाद पाकिस्तान में लीपा पोती का दौर शुरू हो गया है। पाकिस्तानी सेना आजकल सोशल मीडिया को भी एक हथियार बना के अपनी हार और नुकसान को छिपाने की कोशिश करती है। पाकिस्तान ने बालाकोट के बाद से सोशल मीडिया पर कई तरह की रणनीति अपना रखी है।

पहली रणनीति है अपना कम से कम नुकसान बताना और इस तरह की तस्वीरें सोशल मीडिया में चलाना की जैसे भारतीय सेना लक्ष्य पर हमला करने पर पूरी तरह नाकाम रही हो और पाकिस्तान ने ऐसा जवाब दिया हो की हड़बड़ा कर कंही और ही बम फेंक कर वापस आ गए हो। बालाकोट के बाद जले हुए पेंड़ और खुदी पड़ी मिट्टी को इस तरह से दिखाया गया जैसे बस उतना ही नुकसान हुआ हो।

दूसरी रणनीति में पाकिस्तानी सेना अपने किसी भी हमले को इस तरह से दिखती है जैसे भारतीय सेना का काफी नुकसान उसने कर दिया हो। भले ही उसके लिए वो नक्सली हमले में शहीद हुए सीआरपीफ के जवानों की पुरानी फोटो ही क्यों न हो। उन्हें भारतीय सेना का जवान बता कर पाकिस्तानी हमले में शहीद हुआ बता कर सोशल मीडिया पर फोटो शेयर करना। कल भारतीय जवाबी कार्यवाही के बाद पाकिस्तानी अपनी ही सेना के जवानों को भारतीय सेना के जवान बताते हुए ये कह कर वीडियो शेयर करने लगे की भारतीय जवान सफ़ेद झंडा लहराकर अपनी जवानों की लाशें उठाते हुए। जबकि हकीकत इसके ठीक उलट थी।

तीसरी रणनीति है अपने हुए नुकसान को अधिकांश नागरिक ठिकानो पर हुए नुकसान के तौर पर पेश करना। जिस तरह का नुकसान नागरिकों का दिखाया जाता है ऐसा लगता है जैसे भारतीय सेना पाकिस्तान की सेना से न लड़कर वंहा के नागरिकों से लड़ रही हो। और इतने भारी नागरिक नुकसान के बीच पाकिस्तान के सैनिक कभी मरते ही नहीं। कभी कभार ही ऐसे मौके आये है जब पाकिस्तान ने अपने सैनिको की शहादत को स्वीकार किया हो वरना भारतीय हमले में सिर्फ नागरिक ही मरते है। और इस तरह के छल को फैलाने के लिए पाकिस्तानी सेना दुनिया के किसी भी कोने में मारे गए बच्चे को गुलाम कश्मीर में भारतीय सेना के हाथों मारा गया हुआ बताने में हिचकिचाते नहीं।