बीते शुक्रवार को सरकार ने तेलगांना-आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र और गुजरात के बीच एक देश एक राशन कार्ड योजना को लॉन्च कर दिया. योजना के जरिए इन तेलंगाना और आँध्र प्रदेश के नागरिक दोनों राज्यों में एक ही राशन कार्ड के जरिए किसी भी राशन की सरकारी दुकान से सामान ले सकते हैं. इस मौके पर केंद्रीय उपभोक्ता, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान ने कहा, "ये एक ऐतिहासिक दिन है. हमने चार राज्यों में राशन कार्ड की अतंर्राज्यीय पोर्टेबिलिटी को लागू कर दिया है." राशन कार्ड के लिए इस नई योजना से देश के अंदर रोजगार की तलाश में अलग अलग राज्यों में जाने वाले लोगों को बहुत सुविधा हो जाएगी. उन्हें देश में हर कहीं सरकारी राशन की दुकान से सामान मिल सकेगा. हालांकि इसे लागू करने में अभी लगभग एक साल का वक्त है. इसे 1 जून 2020 से लागू करने की योजना है. हम आपको इस योजना के बारे में ज्यादा जानकारी देने जा रहे हैं.

क्या होता है राशन कार्ड ?

राशन कार्ड किसी परिवार के मुखिया के नाम, उस पर निर्भर पारिवारिक सदस्यों और परिवार की आर्थिक स्थिति के आधार पर जारी किया जाता है. इसके जरिए अनाज और केरोसिन जैसा सामान सरकारी कीमत पर मिलता है. सरकार सब्सिडी के जरिए उसमें छूट देती है. 2013 में खाद्य सुरक्षा बिल पास होने के बाद अलग अलग स्तर के राशन कार्ड जारी किए जाने लगे. इसमें एपीएल यानि गरीबी रेखा से ऊपर, बीपीएल यानि गरीबी रेखा से नीचे और अंत्योदय यानि बहुत ही ज्यादा गरीब परिवारों के स्तर बनाए गए. अलग अलग स्तर के लोगों की पहचान करना और उन्हें राशन कार्ड आवंटित करने का काम राज्य की सरकारों का था.

राशन की दुकानें क्या हैं

राशन की सरकारी दुकानों को कोटा भी कहते हैं. दरअसल सरकारी छूट की वजह से सामान्य भाषा में कोटा कहा जाता है. राज्य सरकार इसके लिए लाइसेंस देती है. राशन की इन दुकानों पर गेंहू, चीनी, चावल और केरोसिन सरकारी मूल्य यानि आम बाजार से कुछ कम दाम में मिलता है.

क्या है एक देश, एक राशन कार्ड की योजना ?

अभी की व्यवस्था के मुताबिक किसी भी नागरिक के लिए राशन की एक दुकान तय कर दी जाती है. उसी तय राशन की दुकान के अलावा किसी को भी दूसरी राशन की दुकान से सामान नहीं मिलता. ऐसे में अगर किसी को एक शहर से दूसरे शहर या राज्य में जाना पड़ता है तो उसको सरकारी राशन नहीं मिल पाता. उसका पुराना राशन कार्ड बेकार हो जाता है. शादी के बाद ही किसी महिला को अपने माता पिता के राशन कार्ड हटवाकर अपना नाम अपने पति के साथ जुड़वाना पड़ता है. नए राशन कार्ड को बनवाने की एक प्रक्रिया होती है और उसमें पर्याप्त वक्त लगता है. ऐसे में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

2011 की जनगणना के मुताबिक भारत में 4.1 करोड़ लोग रोजगार की तलाश में एक राज्य से दूसरे राज्य तक जाते हैं. इन लोगों को महंगे दामों पर राशन लेना पड़ता है. एक देश एक राशन कार्ड की व्यवस्था से इन लोगों को बड़ा फायदा होने वाला है. अब यूपी के किसी गांव में बनने वाले राशन कार्ड के जरिए कोई शख्स मुंबई की किसी राशन की दुकान से भी सामान खरीद सकेगा. बेशक जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने के बाद चर्चा एक देश और एक विधान की हो रही है लेकिन एक देश एक राशन कार्ड के जरिए वास्तविकता में देश एक होने वाला है.