बीते दिनों राजस्थान के अलवर में एक और व्यक्ति की भीड़ ने हत्या कर दी. भीड़ को शक था कि रकबर गायों को तस्करी के लिए ले जा रहा है और इसी शक में उसकी हत्या कर दी गई. रकबर की पत्नी गर्भवती हैं और घटना के बाद से घर वालों का बुरा हाल है. खैर होगा भी ये लिखने वाली बात भी नहीं है.
अख़बारों में आज भी तमाम ख़बरें देखता हूँ जहाँ गो तस्कर पकड़े जाते हैं लोग ही पकड़ते हैं लेकिन वो ख़ुद फ़ैसला नहीं करते बल्कि पुलिस के हवाले कर देते हैं. इसी बीच इस तरह की घटनाएँ भी सामने आती हैं.

हमारे देश में झारखंड या अन्य कई राज्यों से ये ख़बरें आती हैं कि किसी को डायन समझकर मार दिया गया या किसी को बच्चा चोर समझकर मार दिया. कई बार रेप जैसे अपराधों के असल अपराधी भी मार दिए जाते हैं.

इसी बीच हमारे सामने एक बड़ी समस्या है और वो ये है कि कहीं हम भीड़ को अलग करके तो देख नहीं रहे. बेशक वाट्स एप पर तमाम उग्र धार्मिक कंटेंट ने लोगों को बदल लिया है और वो धर्म के नाम पर कट्टर होते जा रहे हैं लेकिन समस्या यह है आखिर इतने लोग भीड़ के तौर पर कैसे इकठ्ठा हो जाते हैं कि वो बग़ैर सुने ही लोगों की हत्या कर दें

आज जब हमारे देश में लिंचिंग जैसे विषय पर बहस होती है तो वो भी बेहद ही सांप्रदायिक होती है. पूरे लोगों की भीड़ को कभी बीजेपी कार्यकर्ता तो कभी हिंदू तालिबान बता दिया जाता है.ऐसे में बहस लिंचिंग पर न होकर हिंदू मुस्लिम पर सीमित हो जाती है.

समस्या ये है कि आज शिक्षा की स्थिति ख़राब है. लोग शिक्षित ही नहीं या जो हैं भी वो महज़ किताबें ज्ञान लिए बैठे हैं . यूपी-बिहार में तो ऐसा होना आम बात है. बाकी भी राज्यों में गाँवों की हालत अच्छी नहीं है.ऐसे में लोगों में यह सीख और धैर्य ही नहीं रहा है कि वो किसी ख़बर को सुनकर उस पर प्रतिक्रिया देने से पहले कुछ जानकारी लें. ख़ासकर जब आप किसी को मारने तक जा रहे है . दुर्भाग्य से इन मामलों में धर्म हमें कमज़ोर करता जा रहा है और अभी इस तरह की घटनाओं में धार्मिक उन्माद की बड़ी भूमिका है.

लिंचिंग की इन घटनाओं के बाद सरकार पर भी सवाल खड़े हुए हैं और होने भी चाहिये आखिर उनके मंत्री लिंचिंग के दोषियों का स्वागत करते हैं. ये बेहद अफ़सोसजनक है कि सरकार को जिस मुद्दे पर कड़ा संदेश देना चाहिए वहाँ उसके मंत्री इस तरह के काम कर रहे हैं. अगर सरकार को लगता है कि उनके मंत्री के इस कार्य से उन्हें वोट बैंक का फ़ायदा होगा तो ये सरकार और जनता दोनों के लिए ख़तरनाक है क्योंकि भीड़ को न्याय की आदत अगर लगी तो उसकी चपेट में सभी आ सकते हैं.
फ़िलहाल सरकार ने एक जाँच कमेटी बनाई है जो 1 महीने में अपनी रिपोर्ट देगी. इस रिपोर्ट में क्या आएगा,सरकार इस पर क्या एक्शन लेगी.ये देखने वाली बात होगी. लेकिन अभी सरकार को ज़रूरत है कि ये सुनिश्चित हो कि राज्यों में पुलिस विशेष तौर पर इन घटनाओं के लिए एक्शन ले और अफ़वाहें फैलने से रोके.