कई बार हम अखबार में खबर पढ़ते है की किसी शख्स ने हवाईजहाज के अपहरण की या जहाज में बम होने की झूठी खबर फैला दी। ऐसा करने के पीछे जो कारण सामने आते है वो भी अजीबोगरीब होते है। कई बार लोग सिर्फ शरारत में ऐसा कर देते है। कई बार सामने आया है की कोई शख्स को एयरपोर्ट पहुंचने में देरी हो रही थी तो ऐसा करके प्लेन रोकना चाह रहे थे।

अगर इस तरह का कोई भी ख्याल गलती से भी अगर आपके दिमाग में आये तो कभी भी ये गलती न करें। क्यों सरकार द्वारा 2016 में पास किये गए एंटी हाईजैकिंग कानून के मुताबिक इस केस में न्यूनतम सजा उम्र कैद है और अधिकतम सजा में मौत की सजा का प्रावधान है। साथ ही या गुनाह गैर जमानती है तो सारी उम्र सलाखों के पीछे ही गुजरने का पूरा हिसाब किताब है।

अब हम इस कानून के बारे में आपको क्यों बता रहे है ये भी आपको बता देते है। दरअसल हुआ ये है की मुंबई के एक जूलर बिरजू किशोर सल्ला इस कानून के तहत NIA कोर्ट से उम्र कैद पाने वाले पहले शख्स बन गए है। अदालत ने सल्ला पर 5 करोड़ का जुर्माना भी लगाया है जो की जहाज के पायलट, क्रू मेंबर और यात्रियों में बांट दिया जायेगा।

पायलट को 1-1 लाख रूपये, क्रू मेंबर को पचास हजार रूपये और यात्रियों को पच्चीस-पच्चीस हजार रूपये दिए जायेंगे।

हुआ यूँ की सल्ला को जेट एयरवेज की एक मैनेजर से प्यार हो गया था और पहले से शादी शुदा सल्ला ने ये बात बिना बताये चुपक से शादी भी कर ली थी और अपनी दूसरी बीवी से दिल्ली में नौकरी नौकरी छोड़ मुंबई शिफ्ट होने का दबाब भी बनाने लगा। पर जब वो नहीं मानी तो आशिक सल्ला को एक आईडिया आया की जहाज के अपहरण का फर्जी अफवाह फैला कर बदनाम कर दिया जाये और इससे जेट एयरवेज अपना ऑफिस बंद कर देगी तो उसकी प्रेमिका को नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा।

इस सब के लिए सल्ला ने एक लेटर लिखा और गूगल ट्रांसलेटर से उसे उर्दू में ट्रांसलेट करके जहाज के टॉयलेट तक पंहुचा दिया। उसके बाद जहाज में हड़कंप मच गया और बाद में मामला राष्ट्रीय जाँच एजेंसी को सौंप दिया गया।

अदालत ने सल्ला को दोषी मानते हुए कहा की उसने ये हरकत सोच समझ कर की और इसकी वजह से जहाज के यात्रियों और क्रू मेंबर की जान खतरे ने पड़ गयी। और कोर्ट ने उसे दोषी मानते हुए उम्र कैद की सजा के साथ 5 करोड़ जुर्माना अदा करने का आदेश दिया है।