पूरी दुनिया महिलाओं के यौन शोषण से परेशान है.आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस भी है तो जरूरी है की उस मुद्दे पर बात की जाए जिसने बीते दिनों पूरी दुनिया को झकझोर दिया.नेता अभिनेता,खिलाड़ी तमाम लोगों पर इसकी आंच आई.जी हां हम बात कर रहे हैं मीटू आंदोलन की.हाल फिलहाल में अगर महिलाओं के यौन शोषण के विरोध में किसी बड़ी मुहिम का जिक्र होगा तो मीटू का नाम जरूर आएगा.तमाम सफेद पोश,ताकतवार,खुद को परोपकारी दिखाने वाले लोग इस ऑनलाइन कैंपेन के दायरे में आए और उन्हें या तो माफी मांगनी पड़ी या कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा.

ये अभियान विदेशों में और भारत में भी काफी दिनों से चल रहा था लेकिन तनुश्री दत्ता के नाना पाटेकर पर छेड़छाड़ का आरोप लगाने के बाद से इसने भारत में जोर पकड़ा.इस अभियान में महिलाएं मीटू हैशटैग के साथ सोशल मीडिया पर अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न की घटना को शेयर करती हैं.

भारत में बॉलीवुड से शुरु हुए इस अभियान ने जल्द ही पत्रकारिता जगत को भी अपनी जद में ले लिया और कई बड़े नाम सामने आए जिन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा.इस कड़ी में भारत के विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर का नाम सबसे ऊपर है.अपने समय के जाने माने तेजतर्रार पत्रकार अकबर पर 9 महिलाओं ने यौन शोषण का आरोप लगाया है.अगर बात बॉलीवुड की करें तो फिल्म निर्देशक विकास बहल,गायक कैलाश खेर,अभिनेता आलोकनाथ पर रेप से लेकर यौन उत्पीड़न तक के आरोप लगे.इनके अलावा एआईबी ग्रुप के कॉमेडियन उत्सव चक्रवर्ती,कॉमेडियन वरुण ग्रोवर,लेखक चेतन भगत पर भी महिलाओं ने सोशल मीडिया में मीटू हैशटैग के साथ लिखकर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए.
ये वो कुछ नाम हैं जो भारत भर में जाने जाते हैं.इनकी छवि बड़े साफ सुथरे प्रगतिशील और महिलाओं को अधिकार देने वालों की थी.इसके अतिरिक्त वेबसाइट द वायर के संस्थापक सिद्धार्थ भाटिया,द क्विंट के पत्रकार मेघनाद बोस,न्यूज लॉन्ड्री के चित्रांश तेवारी,राज्यसभा टीवी के दिलीप खान पर महिलाओं ने य़ौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है.

तमाम रिपोर्ट्स इस बात की ओर इशारा कर चुकी हैं की यौन शोषण की अधिकतर घटनाओं में आरोपी अपने ही जान पहचान वाले होते हैं.दरअसल अपने लोगों पर घर परिवार से लेकर पीड़ितों को तक को भरोसा होता है उसे बिल्कुल भी आभास नहीं होता की ये शख्स उसके साथ इतनी घिनौनी हरकत कर सकता है.जिन बड़े लोगों के नाम इस अभियान में सामने आए हैं दरअसल भरोसे के मामले में वो भी बहुत ही ऊपर रहे हैं.प्रगतिशील समाज के लोग फेसबुक से लेकर दुनिया के किसी भी मंच पर महिला अधिकारों की बात करते है.अधिकतर लोग इतने ताकतवर भी हो जाते हैं की किसी को नुकसान या फायदा पहुंचा सकें.ऐसे में इन लोगों के साथ लोगों का संपर्क बढ़ता है और उनमें महिलाएं भी शामिल होती हैं.चूंकि इनकी बातें दुनिया के सामने इतनी अच्छी होती हैं की शायद ही इनके अंदर के दानव को कोई महसूस कर सके.बस इसी बात का फायदा ये लोग उठाते हैं.

फेक न्यूज से लेकर सोशल मीडिया पर फैली तमाम विसंगतियों के बीच मीटू बीते समय में एक सफल अभियान रहा है.सोशल मीडिया को इसके लिए बेशक धन्यवाद कहा जाना चाहिए.इस अभियान ने उन तमाम लोगों को बोलने की हिम्मत दी जो सामाजिक बदनामी से लेकर किसी भी डर की वजह से बोल पाने में असमर्थ थे.इस अभियान ने प्रगतिशील तबके को बेपर्दा किया और खुद के भीतर झांकने को मजबूर किया है.

जिस तरह के लोगों के नाम इस अभियान के बाद सामने आए हैं उनकी बातों को अगर सुना जाए तो आप पाएंगे की इस दुनिया को उपदेशक,हीरो कोई नहीं चाहिेए ,इस दुनिया को सिर्फ अच्छे लोग चाहिए.जो दूसरों को उपदेश देने की बजाय सिर्फ अपनी जिंदगी में अच्छा करने की कोशिश करते रहें.मीटू के ऊपर कई सवाल उठे.कई लोगों ने कहा की इसमें पुरुषों को टारगेट किया जा रहा है.हो सकता है की कुछ मामलों में ऐसा हुआ हो लेकिन आखिर में हम जब देखते हैं की पूरे अभियान से हमें क्या हासिल हुआ तो वो उपलब्धि कई अपवादों से ऊपर हो जाती है.ऐसे में कुछ मामलों को लेकर पूरे अभियान पर सवाल खड़े करना उचित नहीं लगता.

मीटू के ऊपर एक और सवाल खड़ा होता है की इससे ग्रामीण महिलाओं को क्या फायदा होगा.बेशक उनका कोई फायदा नहीं है लेकिन हम ये देखे की जो महिलाएं पहले से सशक्त थी उनका शोषण इस तरह से हुआ और वो अपने वक्त पर बोल नहीं पाईं.ऐसे में कम से कम समाज में महिलाओं की आगे की पंक्ति तो बोल पाई. वर्ना अभी तक तो वो भी चुप थी.उम्मीद है वक्त बदलेगा और ग्रामीण महिलाओं में भी वो हिम्मत आएगी की वो भी अपनी आवाज उठाएंगी