कल लगभग सभी मीडिया हाउस, राष्ट्रीय अखबारों और डिजिटल मीडिया में बैंक के कर्ज से जुड़ी हुई एक खबर छपी। खबर थी की केंद्र की मोदी सरकार ने देश के 50 बड़े कर्जदार और ऐसे कर्जदार जो जानबूझ कर कर्ज नहीं चुका रहे है, उनका कर्ज सरकार ने माफ़ कर दिया है।

खबर चलायी गयी आरटीआई के माध्यम से ये जानकारी रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया से मिली है। कर्जमाफी से लाभ किसे हुआ ये भी बड़े बड़े नाम थे। पहला नाम मेहुल चौकसी का फिर नीरव मोदी का जिन पर कुल मिला कर लगभग 9000 करोड़ रूपये बकाया है। किंग फिशर के मालिक विजय माल्या, कानपुर के रोटोमैक के मालिक कोठारी भी इसी लिस्ट में शामिल बताये गए। कुल रकम जो माफ़ कर दी गयी जैसा की न्यूज़ में बताया गया वो थी 68607 करोड़ रूपये।

राहुल गाँधी ने भी इस पर एक ट्वीट किया। पर राहुल गाँधी ने जिस भाषा में इसको ट्वीट किया वो कई सारे बड़े मीडिया हाउस और भाषा के विषेशज्ञ से बेहतर था। राहुल गाँधी ने कंही नहीं लिखा की कर्ज माफ़ कर दिया गया है। उन्होंने ने लिखा की कर्जदारों को चोरों की लिस्ट में डाल दिया गया है। अब चोरों को चोर की लिस्ट में नहीं डालेंगे तो कान्हा डालेंगे।

असलियत में समाचार को लिखने का तरीका और शीर्षक इस तरह से लिखे गए की लोगों को ये लगे की कर्ज माफ़ कर दिया गया है। पर अंदर लेख में सभी ने एक शब्द का प्रयोग की है की रिज़र्व बैंक ने आरटीआई के जवाब में कहा है की इन लोगों के कर्ज को "write off" कर दिया गया है। write off और कर्ज माफ़ी में बड़ा फर्क है। write off का मतलब होता है जब बैंको की सालाना बैलेंस शीट तैयार होती है तो ऐसे लोन जिनको नॉन परफार्मिंग एसेट यानी की मिलने की सम्भावना नहीं है उनको बैलेंस शीट को बराबर करने के लिए write off कर दिया जाता है।

कोई भी लोन बैलेंस शीट से write off होने का मतलब ये नहीं है की बैंक उसे नहीं वसूलेगी या कर्ज वापस न करने पर कानूनी कार्यवाही नहीं करेगी। और जिन लोगों के नाम लिस्ट में दिए गए उन पर बाकायदा पहले से ही केस चल रहे है। यंहा तक की विजय माल्या लंदन हाई कोर्ट में भी केस हार चुके है। भला हो कोरोना का वरना अभी तक भारत की जेल में हवा काट रहे होते।

कर्ज माफ़ी के लिए टर्म होता है वेव ऑफ। कोई भी लोन वेव ऑफ होने पर ये बैंक के ऊपर है की वो कर्ज माफ़ी के बाद कर्ज दार के खिलाफ कोई कनूनी कार्यवाही करेगा या नहीं। तो कुल मिला कर आरटीआई के जवाब का मतलब यही है की किसी की कर्ज माफ़ी नहीं हुई है।