जीप से एक पत्थरबाज को बाँध कर चर्चा में रहे मेजर गोगोई एक बार फिर से चर्चा में है। कुछ मीडिया हाउस ने लिखा की मेजर गोगोई को श्रीनगर के एक होटल तब गिरफ्तार किया गया जब वो किसी नाबालिक लड़की के साथ वंहा पर मौजूद थे। सोशल मीडिया पर ये खबर भी चली की मेजर गोगोई को श्रीनगर के होटल में एक नाबालिक लड़की के साथ आपत्तिजनक अवस्था में पकड़ा गया।

सोचने वाली बात है की आर्मी का मेजर रैंक का अफसर जो पहले ही चर्चा में रहा हो वो किसी लड़की से मिलने स्थानीय होटल में क्यों जायेगा।

जिस तरह से कश्मीर की स्थानीय मीडिया के द्वारा इस खबर को सोशल मीडिया पर फैलाया गया उससे कंही न कंही ये पूरी खबर संदिग्ध और भारतीय सेना की इमेज को ख़राब करने के उद्देश्य से फैलाई हुई मालूम पड़ती है।
कश्मीर में अफ्स्पा लागू होने की वजह से पुलिस, सेना के किसी अधिकारी को बिना सेना के इजाजत लिए गिरफ्तार नहीं कर सकती है।

मेजर गोगोई पुलिस में अपना बयान दर्ज करा के वापस अपने यूनिट में चले गए। पुलिस को दिए गए अपने बयान में उन्होंने बताया की वो होटल में अपने मुखबिर से मिलने गए थे। वंहा पर होटल के स्टाफ के द्वारा आपत्ति की गयी और उसी विवाद में पुलिस को वंहा बुलाया गया।

कश्मीर में चल रहे मौजूदा छदम युद्ध को बन्दूक और बम तक सीमित होकर देखना शायद इसे समझने में गलती करने जैसे है।

गोली बन्दूक की लड़ाई के समानांतर कश्मीर में एक मानसिक युद्ध भी चल रहा है। जिनके एक हिस्से में नए पैदा हो रहे आतंकियों की सोशल मीडिया पर इमेज मेकिंग करना, उन्हें इस तरह से दिखाना जैसे वो आज़ादी के लिए मर मिटने वाले दीवाने है। अगर आप इन नए आतंकियों के वीडियो और फोटोज पर ध्यान दे तो उनके ड्रेसिंग सेंस, हेयर स्टाइल और हथियारों को पकड़ के चलने का तरीका हॉलीवुड के रेम्बो टाइप से मिलता जुलता नज़र आएगा। हो सकता है ये फैशनबल आतंकी पहले के आतंकियों से लड़ाई में कमजोर हो पर उनके अंदर कश्मीरी युवा को आतंक की राह पर ले जाने के लिए अट्रैक्शन ज्यादा नजर आता है। ये भी एक कारण है की पिछले कुछ समय में लोकल कश्मीरी आतंकियों की संख्या में इजाफा हुआ है।

इसी मानसिक युद्ध का एक हिस्सा कश्मीरी पंडितो की वापसी से भी जुड़ा हुआ है, मीडिया के कई सेक्शन में ये दिखाया गया है की हर कश्मीरी मुसलमान ये चाहता है की कश्मीरी पंडित अपने घर वापस लौट आये।
असल में कश्मीरी पंडितो का सामूहिक संहार करके उन्हें कश्मीर से भगा देना कश्मीर में चल रहे आतंकी गतिविधियों को आज़ादी की लड़ाई साबित करने में सबसे बड़ा रोड़ा है।

हिज़्बुल के कई आतंकियों का भी बयान आता रहता है की वो कश्मीरी पंडितो की वापसी चाहते है। असल में वो इस तरह की इमेज बनाना चाहते है की भारतीय सेना जुल्म कर रही है और वो कश्मीर के हर व्यक्ति की आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे है चाहे वो कश्मीरी मुसलमान हो या कश्मीरी पंडित।
सेना की इमेज ख़राब करना आतंकियों और अलगाववादियों का पुराना पैतरा रहा है। कुछ लोग ये तर्क दे सकते है की इससे क्या फर्क पड़ने वाला है। ये बात सही है की दस में आठ लोग मेजर गोगोई पर लगाए गए आरोप गलत माने पर दो लोग ऐसे होंगे जो कंही ना कंही ये सोचेंगे की हो सकता है ऐसा हुआ हो। ये शक पैदा करना ही आतंकियों का उद्देश्य है।