महाराष्ट्र के मावल लोकसभा सीट पर लड़ाई बेहद रोचक है. यहां एनसीपी प्रमुख शरद पवार के पोते और अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार चुनाव लड़ रहे हैं. उनके खिलाफ बीजेपी शिवसेना गठबंधन के श्रीरंग बर्ने मैदान में हैं. बर्ने का नाम सबसे बढ़िया काम करने वाले सासंदों में गिना जाता है. वो लगातार दो बार से मावल सीट से सांसद हैं. कहा जाता है कि बर्ने की राह मुश्किल नहीं थी लेकिन पार्थ पवार के मैदान में उतरने से यह मुश्किल हो गई है.

पार्थ पवार के चुनाव लड़ने के बारे में कहा जाता है कि वो शरद पवार की इच्छा के विपरीत चुनाव लड़ रहे हैं. दरअसल लोकसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज होने के साथ शरद पवार ने एलान किया कि वो चुनाव नहीं लड़ेंगे. लेकिन कुछ दिनों बाद उन्होंने माढ़ा से चुनाव लड़ने का एलान किया. इसी बीच पार्थ मावल से चुनाव लड़ने का मन बना चुके थे. पवार की पार्टी का नियम है कि यहां दो से ज्यादा एक परिवार के सदस्य एक चुनाव में नहीं उतरते. पवार की बेटी सुप्रिया सुले पहले से बारामती से मैदान में हैं. दूसरी तरफ पार्थ पवार ने भी चुनाव से वापस पैर खींचने से इंकार कर दिया था. ऐसे में शरद पवार ने खुद को चुनाव के मैदान से दूर कर दिया. 29 साल के पार्थ को चुनाव में जीत दिलाने के लिए पूरा पवार परिवार यहां जुट चुका है. सुप्रिया सुले, शरद पवार यहां चुनाव प्रचार में हिस्सा ले रहे हैं. अजीत पवार ने भी यहां से बेटे को जीत दिलाने की भावुक अपील की है. पवार परिवार पार्थ के लिए विरोधियों को भी साथ जोड़ रहा है. आप के टिकट पर 2014 का चुनाव लड़े मारूति भापकर से भी बातचीत की गई है.

दूसरी तरफ शिवसेना के लिए यहां का मैदान मजबूत रहा है. बीजेपी के स्थानीय नेताओं से टकराव के बावजूद श्रीरंग बर्ने यहां से सांसद रहे हैं. बर्ने और बीजेपी नेताओं के बीच शीर्ष नेतृत्व को सुलह करानी पड़ी है. बर्ने की यहां के किसान परिवारों पर मजबूत पकड़ है. उन्होंने अपने प्रचार में बताया है कि किस तरह से अजीत पवार के डिप्टी सीएम और सिंचाई मंत्री रहते यहां के किसानों पर गोली चली थी और तीन किसानों की जान चली गई थी. पवार परिवार भी इस गुस्से को बखूबी समझता है लेकिन उसे उम्मीद है कि पिपरी छिंचवाड़, पनवेल और कारजट के शहरी क्षेत्रों के लोग उसे वोट करेंगे. पवार परिवार यहां वादा कर रहा है कि पार्थ के चुनाव जीतने से यहां का ज्यादा विकास होगा.

बार्ने यहां खुद को स्थानीय प्रत्याशी बताते हुए चुनाव लड़ रहे हैं. उनका कहना है कि पार्थ बाहरी उम्मीदवार हैं और वो ही स्थानीय मुद्दों को हल कर सकते हैं. बीते चुनाव में यहां बार्ने को 5,52226 यानि कुल 46 फीसदी वोट मिले थे. वहीं पीडब्ल्यूडी पार्टी के लक्ष्मण जगताप को 3 लाख से ज्यादा वो़ट मिले थे और वो 30 फीसदी वोटों के साथ दूसरे स्थान पर थे. एनसीपी के राहुल नार्वेकर को यहां 1,82,293 वोट मिले थे और 15 फीसदी वोटों के साथ तीसरे स्थान पर थे.

इस चुनाव में एनसीपी और पीडब्ल्यूपी के बीच गठबंधन हुआ है. ऐसे में अगर पार्थ पवार पीडब्ल्यूपी और एनसीपी के पूरे वोटरों को साथ लाने में कामयाब रहते हैं तो शिवसेना के श्रीरंग बार्ने को यहां हार का सामना करना पड़ सकता है.