प्रियंका गांधी को यूपी कांग्रेस पार्टी का महासचिव बनाया गया है.उन्हें पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है.लोग इसे कांग्रेस का मास्टरस्ट्रोक,ब्रह्मास्त्र जैसा कदम बता रहे हैं.राहुल गांधी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रियंका गांधी को बहादुर बताया है.बीजेपी ने इसे कांग्रेस का परिवारवाद बताया है साथ ही राहुल गांधी के फेल होने का प्रतीक भी बताया गया है.उसकी सहयोगी जेडीयू ने कांग्रेस के इस कदम का स्वागत किया है.

बीते लोकसभा चुनाव में प्रियंका को राहुल गांधी की सीट अमेठी और सोनिया गांधी की सीट रायबरेली का प्रभारी भी बनाया गया था.2014 और यूपी चुनाव में शिकस्त के बाद कई जगह ऐसे पोस्टर लगाए भी गए थे की प्रियंका गांधी को राजनीति में लाया जाए.जब जब इस तरह के पोस्टर लगे तो ये चर्चाएं हुईं की क्या प्रियंका गांधी राजनीति में आएंगी.हालांकि हर बार कोई एलान नहीं हुआ.

जब प्रियंका गांधी के राजनीति में आने की चर्चा हुई तब हर बार ये कहा गया है की वो सोनिया गांधी की सीट रायबरेली से मैदान में उतर सकती हैं.दूसरी तरफ अभी खबरें ये भी आ रही हैं की राहुल गांधी अमेठी के अलावा महाराष्ट्र के नांदेड़ और मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से भी लोकसभा चुनाव में उतर सकते हैं. राहुल के इस कदम के पीछे स्मृति ईरानी की अमेठी में सक्रियता को एक बड़ा कारण बताया जा रहा है.बीते चुनाव में स्मृति ईरानी ने एक बाहरी उम्मीदवार होते हुए भी महज 15 दिनों में अमेठी में अच्छे वोट जुटाए थे.

आमतौर पर राहुल गांधी का चुनाव हारने वाले उम्मीदवार से वोटों का अंतर 5 लाख होता था जो स्मृति के वक्त महज 1 लाख पर आ गया.खास बात ये है की स्मृति बीते चुनाव के बाद से अमेठी को भूली नहीं और लगातार जाती हैं.ऐसा शायद ही कोई महीना हो जब वो अमेठी न गईं हों.दूसरी तरफ राहुल गांधी का अमेठी जाना आज भी खबर बनता है.

ऐसे में राहुल के लिए अमेठी का लोकसभा चुनाव मुश्किल होने जा रहा है.अगर राहुल गांधी अमेठी हारते हैं तो गांधी परिवार और कांग्रेस के लिए शर्मनाक होगा.दूसरी तरफ अगर वो अन्य राज्यों में बेहतर प्रदर्शन के लिए अमेठी छो़ड़ते हैं तो विरोधियों को ये कहने का मौका मिलेगा की राहुल गांधी एक सांसद के तौर पर फेल हुए हैं और वो अमेठी से भाग रहे हैं.ऐसे में हर स्थिति में कांग्रेस के लिए वहां मुसीबत थी.प्रियंका के चुनाव लड़ने पर कांग्रेस की तरफ से अभी भी कोई साफ बयान सामने नहीं आ रहा है.चूंकि अनुमान ये है की अगर वो चुनाव लड़ेंगी तो रायबरेली से लड़ेंगी लेकिन जो हालात हैं वो इशारा कर रहे हैं की शायद कांग्रेस उन्हें राहुल गांधी की जगह अमेठी से उतारे.

ऐसा करके वो अमेठी में गांधी परिवार के नए चेहरे के साथ जाएंगे.साथ ही स्मृति के सामने गांधी परिवार की एक महिला उम्मीदवार होगी.ऐसे में अमेठी में कांग्रेस की धसकती जमीन को एक नया बल मिल सकता है