नरेंद्र मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में काम कर रही है. लो अपना बजट भी पेश कर चुकी है. बीजेपी सरकार ने बीती 23 मई को लगातार दूसरी बार प्रचंड बहुमत से सरकार बनाई थी. बीजेपी गठबंधन ने 352 सीटों पर कब्जा किया था. माना जा रहा है कि सरकार की कुछ नीतियों और जातिगत राजनीति को साधकर पीएम मोदी ने दूसरी बार चुनाव जीता है. चुनावी से जुड़े सर्वे और अध्ययन करने वाली संस्था सीएसडीएस-लोकनीति की मानें तो हिंदू सवर्णों से लेकर दलितों तक ने 2014 के मुकाबले 2019 में बीजेपी को ज्यादा वोट दिया है.

सीएसडीएस और लोकनीति ने सभी जाति वर्गों और धर्म के वोट परसंर्टेज के अलग अलग आंकड़े पेश किए हैं. एजेंसी के मुताबिक अगर हिंदुओं की बात करें तो 2014 के मुकाबले बीजेपी को वोट देने वाले हिंदू वोटरों की संख्या में ही इजाफा हुआ है. एजेंसी के मुताबिक 2014 में जहां बीजेपी को 36 फीसदी हिंदू वोट मिले थे वहीं 2019 में 44 फीसदी हिंदू वोट मिले. इस तरह बीजेपी को वोट देने वाले हिंदुओं की संख्या में 8 फीसदी का इजाफा हुआ है. सर्वण हिंदुओं को बीजेपी का पारंपरपिक वोटर माना जाता है. चुनाव से पहले आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को आरक्षण देने की बात करके मोदी सरकार ने इन्हें साधा भी था. सीएडीएस के आंकड़े बताते हैं कि बीजेपी का ये वोटर 2019 में उसके साथ और मजबूती से खड़ा हो गया. 2014 के चुनाव में जहां 47 फीसदी सवर्णों ने बीजेपी को वोट किया था वहीं 2019 में 52 फीसदी सवर्णों ने बीजेपी को वोट किया.

ओबीसी में जातियों का एक बड़ा वर्ग शामिल है. पीएम खुद के कई बार इस वर्ग का होने की बात करते हैं. एजेंसी से आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ग ने बीजेपी को 2019 में खूब प्यार दिया. 2014 में जहां 34 फीसदी ओबीसी ने बीजेपी को वोट किया था वहीं 2019 में 44 फीसदी ओबीसी ने वोट किया. इस तरह से 2014 के मुकाबले 10 ओबीसी का 10 फीसदी वोट बीजेपी को ज्यादा मिला.कई पार्टियां दलितों का हितैषी होने का दावा करती हैं. उन्हें लगता है कि दलितों का वोट केवल उन्हीं को मिलता है. 2019 का चुनाव ऐसे लोगों के लिए भी एक झटका है. बीजेपी को ओबीसी की तरह ही दलितों का 10 फीसदी ज्यादा वोट मिला है. 2014 में बीजेपी को दलितों का 24 फीसदी वोट मिला था जबकि 2019 के चुनाव में 34 फीसदी दलितों ने बीजेपी को वोट किया.

आदिवासियों ने भी बीजेपी को काफी वोट दिए हैं. इनकी संख्या में भी 2014 के मुकाबले इजाफा हुआ है. 2014 में जहां 37 फीसदी आदिवासियों ने बीजेपी को वोट दिया था वहीं 2019 में 44 फीसदी आदवासियों ने बीजेपी को वोट किया है. इस तरह बीजेपी के आदिवासी वोटरों में 9 फीसदी का इजाफा हुआ है. मुस्लिमों के बीच बीजेपी की छवि को लेकर सवाल उठाया जाता है और बीजेपी के 2014 के 2019 के मुकाबले बीजेपी के मुस्लिम वोटरों में कोई इजाफा नहीं हुआ है. दोनों ही चुनावों में बीजेपी को 8 फीसदी मुस्लिमों को वोट दिया. ईसाई वोटरों के मामले में भी बीजेपी को फायदा हुआ है. 2014 के मुकाबले 2019 में बीजेपी को वोट देने वाले ईसाई वोटरों की संख्या में 4 फीसदी का इजाफा हुआ है. 2014 में बीजेपी को 7 फीसदी ईसाईयों ने वोट किया था वहीं 2019 में 11 फीसदी ईसाईयों ने वोट किया है.