मुंबई की आरे कालोनी में पेड़ काटने पर अभी सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को करेगा. मुंबई की इस कालोनी को मुंबई का फेफड़ा जैसे नामों से जाना जाता है और यही वजह है कि यहां पेड़ काटने का विरोध किया जा रहा है. मेट्रो रेल प्रोजेक्ट की वजह से इस कालोनी में 2700 पेड़ काटे जाने हैं और महाराष्ट्र में बीजेपी की सहयोगी शिवसेना भी पेड़ काटे जाने का विरोध कर रही है.

मुंबई की इस कालोनी में पहला पेड़ 1951 में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने लगाया था. आज ये पूरी कालोनी 3166 एकड़ में फैली हुई है और एक जंगल की तरह है. हालांकि वन विभाग से लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट तक आरे को जंगल मानने से इंकार कर दिया है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने पेड़ो की कटाई पर रोक भी नहीं लगाई थी. आरे जंगल की कटाई का सोशल मीडिया पर भी काफी विरोध हो रहा है. लोग पेड़ों को काटे जाने से नाराज हैं, लेकिन इस मामले में बात सिर्फ पेड़ों को काटे जाने की ही नहीं है. जिस प्रोजेक्ट के लिए ये जमीन दी जा रही है वो सरकारी है. मेट्रो परियोजना का प्रोजेक्ट है. इसमें कहीं से भी किसी उद्योग धंधे या लोगों के रहने के लिए पेड़ काटने की बात नहीं है.

मुंबई में साल 2014 वर्सोवा से लेकर घाटकोपर तक मेट्रो रेल सेवा की शुरुआत हुई. इसी के साथ ही मेट्रो के विस्तार पर विचार हुआ और अब मेट्रो शेड बनाने के लिए आरे के 2700 से ज्यादा पेड़ काटने की तैयारी है. बीबीसी के मुताबिक मुंबई मेट्रो रेल कार्पोरेशन का कहना है कि ये एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है. जिस इलाके से होकर इसे गुजरना है वहां लोकल ट्रेन से गिरकर रोज 10 लोगों की मौत होती है. लोकल ट्रेनों की खराब हालत भी किसी से छिपी नहीं है. इनमें से भीड़ का आलम बहुत ही खराब है. तमाम लोग इनमें दरवाजों पर लटककर सफर करते हैं. ऐसे में रोज लोगों की जान जाती है. ऐसे में मेट्रो का विस्तार जरूरी है ताकि लोगों की जान कम से कम न जा पाए.

पर्यावरण के लिए पेड़ भी जरूरी हैं लेकिन लोगों की जान बचाना भी जरूरी है. ये सही है कि बढ़ती जनसंख्या का ही ये दुस्प्रभाव है लेकिन जो समस्या फिलहाल सामने है उससे भी निपटना जरूरी है. ऐसे हालात में जरूरी है कि आरे में पेड़ काटे तो जाएं लेकिन कम से दोगुने पेड़ किसी जगह लगाने की व्यवस्था भी की जाए. सरकारें आम तौर पर निकम्मी होती हैं ऐसे में कोर्ट की ये जिम्मेदारी होनी चाहिए कि सरकार को पेड़ काटने के साथ लगाने का भी आदेश दे और पूरी प्रक्रिया की निगरानी भी करे.