चाहें रेल दुर्घटना के बाद अपने पद से इस्तीफा देना हो या जय जवान जय किसान का नारा देना.लोगों को अपनी सादगी से अपनी प्रेरणा देने वाले भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की आज पुण्यतिथि है.1966 में 10 जनवरी की रात को ही भारत ने ताशकंद में अपने प्रधानमंत्री को खो दिया था.

साधारण से परिवार में जन्म लेकर हमेशा सादगी से रहने वाले शास्त्री ने जिस खामोशी से इस दुनिया को अलविदा कह दिया वो कई सवाल छोड़ गई.1965 में पाकिस्तान को शिकस्त देने के बाद प्रधानमंत्री शास्त्री1966 में समझौते के लिए रूस के ताशकंद गए थे.उन दिनों उनके प्रेस सेक्रेटरी रहे दिवंगत पत्रकार कुलदीप नैय्यर ने अपनी जीवनी 'बियॉन्ड द लाइन्स' में उस पूरे वाकये का जिक्र किया है.

नैय्यर लिखते हैं की ताशकंद समझौते की रात वो अपने कमरे में सो रहे थे.तभी एक रूसी महिला ने उनका दरवाजा खटखटाकर उन्हें प्रधानमंत्री की गंभीर हालत के बारे में बताया.नैयर लिखते हैं जब वो शास्त्री के कमरे की तरफ गए तो देखा की वहां बाहर रूसी पीएम कोसिगिन खड़े थे.और कमरे में शास्त्री अपने बेड पर मृत अवस्था में लेटे हुए थे.नैयर के सोने जाने से लेकर रात ढाई बजे तक के वक्त में भारत अपने चहेते प्रधानमंत्री को खो चुका था.शास्त्री के निधन का कारण हार्ट अटैक बताया गया.हालांकि उनके डॉक्टर कहते थे की उन्हें कभी दिल की समस्या नहीं हुई थी. लाल बहादुर शास्त्री की पत्नी ललिता देवी का कहना था की उनका शरीर मौत के बाद नीला पड़ गया था.हालांकि शास्त्री के निधन को आज भी स्वाभाविक ही माना जाता है.

शास्त्री जी के बारे में कई किस्से हैं.1964 में जब उन्होंने प्रधानमंत्री का पद संभाला तो देश अनाज के संकट से जूझ रहा था.अमेरिका ने उन दिनों कुछ शर्तों पर अनाज देने की पेशकश की,लेकिन शास्त्री ने इसे नकार दिया.उन्होंने देश के स्वाभिमान के लिए हर नागरिक से हफ्ते में एक दिन उपवास रखने को कहा.उन्होंने कहा ,"पेट पर रस्सी बांधो, साग-सब्जी ज्यादा खाओ, सप्ताह में एक दिन एक वक्त उपवास करो, देश को अपना मान दो." पीएम की इस अपील को पूरे देश ने माना भी.

इसी तरह पीएम बनने के बाद उनके बच्चों उनसे कार लेने की जिद की तो उन्होंने अपना अकाउंट चेक कराया.उनके खाते में महज 7000 हजार रूपये थे और उन दिनों फिएट कार 12 हजार की आती थी.जब उनके बच्चों को पता चला की उनके पास पैसे नहीं हैं तो उन्होंने अपने पिता को कार लेने से मना कर दिया.

शास्त्री को मरणोपरांत 1966 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया.भारत में बहुत से लोगों का मानना है की ये भारत का दुर्भाग्य है की शास्त्री जी महज दो साल प्रधानमंत्री रह पाए.उनके निधन पर कवि आत्मप्रकाश शुक्ल ने लिखा है..

कैसे भर सकेगा उनके कर्ज को वतन
प्राण दिए पर न लिया हाथ भर क़फ़न
संधियों पे और लोग दस्तख़त करें
वे निभा गए हैं देश को दिया वचन
प्राण दे के जय वतन पुकारते रहे