सोमवार रात कई मीडिया चैनलों और सोशल मीडिया में ये खबर चलने लगी की 45 साल बाद भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी हुई। पिछले कुछ समय से चले आ रहे तनाव के बाद लगभग सभी को पता लग गया है की दोनों देशों में गोली न चलाने को लेकर एक समझौता हो रखा है।

भारतीय मीडिया में ये खबर चीन के सरकारी समाचार एजेंसी ग्लोबल टाइम्स के हवाले से चलायी जा रही थी। ग्लोबल टाइम्स चीनी सरकार का मुखपत्र है और अफवाहें फैलाने से लेकर फर्जी खबरें चलाने में माहिर है। ग्लोबल टाइम्स ने चीन की सेना के वेस्टर्न थिएटर कमांड के हवाले से लिखा की "भारतीय सेना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पार करके कुछ इलाकों में कब्ज़ा करने की कोशिश की और बातचीत के लिए गए चीनी दल पर गोलीबारी की। जिसके बाद चीन की सेना ने जवाबी कार्रवाही की।"

भारतीय सेना ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है की "भारतीय सेना ने किसी भी समय वास्तविक नियंत्रण रेखा को पार नहीं किया है। चीन की सेना के जवानों ने नियंत्रण रेखा से पास एक भारतीय चौकी को निशाना बनाने की कोशिश की। भारतीय सैनिकों ने जब उन्हें वंहा से दूर रहने के लिए कहा तो कुछ चीनी सैनिकों ने हवा में गोलियां चलायी।"

"भारतीय सेना ने सयंम से काम लेते हुए चीन की इस उकसावे की कार्रवाही का कोई जवाब नहीं दिया। भारतीय सैनिकों की तरफ से कोई गोलीबारी नहीं की गयी है। चीन की वेस्टर्न थिएटर कमांड और ग्लोबल टाइम्स अपने देश की जनता और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को भ्रमित करना चाह रहे है।"

हालांकि सेना का आधिकारिक बयान जो भी रहे पर यह अब साफ़ हो चुका है की सीमा पर तनाव इस कदर बढ़ चुका है की छुटपुट गोलीबारी भी होनी लगी है। इससे पहले २९/३० अगस्त को भारतीय सेना की कार्रवाही के दौरान स्पेशल फ्रंटियर फ़ोर्स के जिस तिब्बती जवान की शाहदत हुई थी, अनाधिकारिक रूप से कई जगह ये लिखा गया की उसके शरीर में गोलियों के निशान थे।

जिस तरह से सेना ने काफी समय लेकर सोच समझ कर अपना बयान जारी किया है उससे पता लग रहा है की चीन के साथ चीन की ही भाषा का प्रयोग किया जा रहा है। पहले नियंत्रण रेखा पर आक्रामकता दिखाओ फिर दुश्मन को उसके घर में ही परास्त करो और बयान जारी करके दुश्मन को ही पूरी घटना के लिए जिम्मेदार बताओ। चीन की सेना, मीडिया और सरकार सब इसी नीति का प्रयोग करते रहे है। ये अलग बात है भारत ने चीन का दांव उसी पर आजमा दिया है।