कश्मीर में मंगलवार रात आतंकियों ने 5 गैर कश्मीरी मजदूरों की गोली मार कर हत्या कर दी और एक मजदूर को गंभीर रूप से घायल कर दिया। सभी मजदूर पश्चिम बंगाल के रहने वाले थे और रोजी रोटी की तलाश में कश्मीर पहुंचे हुए थे। कश्मीर में दूसरे प्रदेशों से आकर काम करने वाले मजदूरों की संख्या काफी है। इनमे से ज्यादातर बिहार और बंगाल से आते है।

धारा 370 के हटने के बाद आतंकी मुख्यता बाहरी मजदूरों, ट्रक ड्राइवर को निशाना बना रहे है। सुरक्षाबल हमेशा आतंकियों के निशाने पर रहते है। पर आतंकियों की कमर टूटने के बाद सुरक्षाबलों को निशाना बनाना उतना आसान नहीं है। उसकी तुलना में ट्रक ड्राइवर जो की ज्यादातर या तो पंजाब से या जम्मू से आते है और बाहरी मजदूर को निशाना बनाना आसान और सुरक्षित है।

आतंकियों के बदली हुई इस रणनीति के कई मायने है। जब हम आतंकियों की रणनीति की बात करते है तो हम बात करते है पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई, पाकिस्तानी सेना और वंहा की सरकार की। क्योकि कश्मीर में आतंकी कार्यवाही को किस दिशा में बढ़ावा देना है ये सीमा पार पाकिस्तान से ही तय होता है।

धारा 370 के हटने से पहले आतंकी आये दिन आम कश्मीरियों को निशाना बना रहे थे जिससे की आतंकियों की कश्मीर की आज़ादी के लिए लड़ने की इमेज ख़राब हो रही थी। बीते साल आतंकियों ने कई लोकल कश्मीरियों को मौत के घाट उतार दिया और फिर घटना का वीडियो भी वायरल कर दिया गया। ज्यादातर पर भारतीय सेना के लिए जासूसी करने के आरोप लगाये गए थे।

370 हटने के बाद आम भारतीयों में जो सबसे बड़ा सन्देश यह गया है की अब कोई भी कश्मीर में जा कर रह सकता है या वंहा सम्पति खरीद सकता है। आतंकियों ने मौका मिलते ही बाहरी मजदूरों और ट्रक ड्राइवर को मार कर एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश की है। एक तो वह यह सन्देश देना चाहते है की कश्मीरियों के वो हमदर्द है और इसलिए वो सिर्फ बाहरी लोगों को मार रहे है दूसरा वह आम भारतीयों को यह सन्देश देना चाहते है की कश्मीर में उनकी कोई जगह नहीं है और आप धारा 370 तो हटा सकते है पर वो उन्हें कश्मीर में सही सलामत रहने नहीं देंगे। लोगों में असुरक्षा का माहौल पैदा कर वंहा से पलायन जैसा वातावरण तैयार करना।

पाकिस्तान 1990 में लगभग इसी तरह से भयावह माहौल पैदा करके कश्मीरी पंडितो को वंहा से पलायन कर जाने को मजबूर कर चुका है। अपने पुराने अनुभव को दोहराते हुए वह दोबारा से कश्मीर में कश्मीरी बनाम बाहरी का मुद्दा बनाने की कोशिश में लगा हुआ है। आने वाले दिनों में कश्मीर में इस तरह के हमले दोबारा देखने को मिल सकते है। देखना वाली बात ये होगी की भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसी किस तरह से इन हमलों को रोकती है।