शगुन के नाम पर हजारों रूपये मांगना और न देने पर गुंडा गर्दी, गाली गलौज करना, ज्यादातर किन्नरों की हमारे समाज में यही पहचान है। अपनी इन्ही सब हरकतों की वजह से किन्नरों की समाज में कभी भी सकारात्मक पहचान नहीं बनी। कई बार इस तरह के आंकड़े भी सामने आते रहे है की किन्नरों के भेष में रहने वाले ज्यादातर पुरुष है और नेग के नाम पर लाखों की कमाई की वजह से किन्नर बन कर रहते है।

कभी शादी के अवसर पर और कभी बच्चे के जन्म होने जैसे ख़ुशी के मौके पर लोग झंझट में नहीं पड़ना चाहते और ये लोग उसी का फायदा उठाते चले आ रहे है। कई बार पैसे के साथ गहने की मांग करना और न देने पर कपड़े उतार के महिलाओं के साथ बदतमीजी करना किन्नरों के लिए आम बात है। लोग न तो पुलिस में शिकायत करते है न ही पुलिस कुछ कार्यवाही करती है।

समाज और प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये के वजह से सूरत में एक युवक को अपनी जान गंवानी पड़ी। सूरत में मेहनत करके के अपने परिवार का पेट पालने वाले गहरीलाल खटीक की 2 बेटियां थी, पिछले हफ्ते उनकी बीवी ने एक बेटे को जन्म दिया। परिवार में काफी ख़ुशी का माहौल था। तभी बेटे के जन्म की ख़ुशी का नेग मांगने तीन किन्नर वंहा पहुंचे। अपनी आदत के अनुसार इन किन्नरों ने 11000 रूपये नेग की मांग की।

साधारण परिवार से सम्बन्ध रखने वाले गहरीलाल के पास इतने पैसे नहीं थे उन्होंने ने 2100 रूपये देने की बात कही। इतना सुनते ही किन्नरों ने अपने कपड़े उतार के गाली गलौज करना शुरू कर दिया। बवाल बढ़ता देख गहरीलाल ने पड़ोसी से उधार ले कर 7000 रूपये किन्नरों को दिए।

पर 11000 से एक रुपया कम न लेने की मांग पर अड़े किन्नरों ने गहरीलाल के साथ मारपीट शुरू कर दी। मारपीट की आवाज सुन पास पड़ोस के लोग मदद के लिए आये पर तभी किन्नरों ने गहरीलाल का सिर दिवार से दे मारा, गंभीर रूप से घायल गहरीलाल को हॉस्पिटल ले जाया गया पर उन्हें बचाया नहीं जा सका। बच्चे के जन्म की खुशी मना रहे परिवार की सारी खुशियां नेग के नाम पर पल भर में छीन ली गयी। हालांकि पुलिस ने तीनों किन्नरों को गिरफ्तार कर लिया है पर नेग के नाम पर होने वाली इस लूट में जो एक जीवन छीन लिया उसकी भरपाई दोबारा की जा सकती है?

किन्नरों का आतंक सिर्फ खुशियों के मौके पर ही नहीं यात्रा के दौरान रोडवेज बसों और ट्रेनों में अकसर देखने को मिलता है। दिल्ली से उत्तर प्रदेश और बिहार की तरफ जाने वाली ट्रेनों के जनरल और स्लीपर क्लास में ज्यादातर गरीब मेहनतकश लोग कुछ जमा पूँजी लेकर अपने घर जाते है। किन्नरों द्वारा इन डिब्बों में लूटपाट करना, गाली गलौज और मारपीट करना आम बात है। पुलिस इस तरह के मामलों में कार्यवाही नहीं करती। और लूटेरे किन्नरों के हौंसले बुलंद रहते है।

प्रशासन की तरफ से अब किन्नरों की इन गतिविधियों पर रोक लगाने का समय आ चुका है। सरकार को चाहिए की जो वास्तव में किन्नर है उनकी मेडिकल जाँच करा के उनकी पहचान कराये, साथ ही उनकी शिक्षा और समाज की मुख्य धारा में लाने का प्रयास करे। समाज को चाहिए की किन्नरों का मजाक बनाना बंद करे और उन्हें दूसरे लोगों की तरह सम्मान दे। पिछले कुछ समय में एक दो उदाहरण किन्नर समुदाय से आये है जब कुछ लोग अच्छी शिक्षा के बाद सम्मानित नौकरी कर रहे है और समाज में अच्छी पहचान बनायीं है। इस तरह भीख मांग कर, लोगों के साथ मारपीट और लूटपाट करके किन्नर समुदाय कभी भी समाज में अच्छी पहचान नहीं बना पायेगा।