केरल में एक माता पिता ने मानसिक तौर पर दिव्यांग अपनी इकलौती बेटी के लिए अपनी संपत्ति सरकार को दान देने का फैसला किया है.दरअसल 37 साल की प्रिया के माता पिता इस बात को लेकर चिंतित थे कि उनके न रहने पर उनकी बेटी की देखभाल कौन करेगा.ऐसे में उन्होंने सरकार को अपना एक घर दान देने का फैसला किया और सलाह दी कि इसे मानसिक रुप से दिव्यांग महिलाओं की देखभाल का केंद्र बनाया जाए.

प्रिया के माता पिता की मांग को स्वीकार करते हुए केरल सरकार ने भी 3 करोड़ रुपए की कीमत के घर को स्वीकार कर लिया है.केरल की सामाजिक कल्याण मंत्री ने कहा कि सरकार इस घर को मानसिक रुप से दिव्यांग महिलाओं के देखभाल केंद्र के तौर पर विकसित करेगी.अभी इसमें 10 महिलाओं के पुनर्वास की व्यवस्था है लेकिन सरकार इसे बढ़ाकर 50 महिलाओं के रहने योग्य बनाएगी.

प्रिया के माता पिता की मांग पर इस देखभाल केंद्र का नाम प्रिया के नाम पर ही रखा जाएगा.केरल की मंत्री ने कहा कि इसमें रहने वाली महिलाओं को घर जैसा माहौल दिया जाएगा और साथ ही स्वास्थ्य सेवाएं भी दी जाएंगी.प्रिया के माता पिता ने अपने दो और घरों को सरकार को दान देने का ऑफर दिया है और इनमें से एक घर में वो रहते भी हैं.उनकी इच्छा है कि इन दोनों घरों को भी सरकार मानसिक तौर पर दिव्यांग महिलाओं के देखभाल केंद्र के तौर पर विकसित करे.

प्रिया के पिता कमलासन ने कहा कि वो अपनी बेटी के भविष्य के लिए चिंतित थे,"अगर उसे किसी रिश्तेदार की जिम्मेदारी में सौंपा जाता तो ये जरुरी नहीं था कि वो उसकी ठीक तरह से देखभाल करते. हमने बहुत से ऐसे मामले देखें हैं जिनमें रिश्तेदार संपत्ति के लालच में मानसिक तौर पर दिव्यांग लोगों को मार तक डालते हैं."

"केरल सरकार का ये फैसला हमारे लिए बड़ी राहत लेकर आया है.अब हमें अपनी बेटी के लिए परेशान होने की जरुरत नहीं है.हमारी बेटी उस घर में जल्द ही शिफ्ट हो सकती है.वो घर जैसे वातावरण में रह सकेगी अन्यथा हमारी मौत के बाद उसे बेहद परेशान होना पड़ता."

आपको बता दें कि केरल सरकार के समाज कल्याण विभाग के 2015 के एक सर्वे के मुताबिक राज्य की कुल आबादी की 2.21 फीसदी आबादी मानसिक और शारीरिक तौर पर दिव्यांग है.

केरल में एक माता पिता ने मानसिक तौर पर दिव्यांग अपनी इकलौती बेटी के लिए अपनी संपत्ति सरकार को दान देने का फैसला किया है.दरअसल 37 साल की प्रिया के माता पिता इस बात को लेकर चिंतित थे कि उनके न रहने पर उनकी बेटी की देखभाल कौन करेगा.ऐसे में उन्होंने सरकार को अपना एक घर दान देने का फैसला किया और सलाह दी कि इसे मानसिक रुप से दिव्यांग महिलाओं की देखभाल का केंद्र बनाया जाए.

प्रिया के माता पिता की मांग को स्वीकार करते हुए केरल सरकार ने भी 3 करोड़ रुपए की कीमत के घर को स्वीकार कर लिया है.केरल की सामाजिक कल्याण मंत्री ने कहा कि सरकार इस घर को मानसिक रुप से दिव्यांग महिलाओं के देखभाल केंद्र के तौर पर विकसित करेगी.अभी इसमें 10 महिलाओं के पुनर्वास की व्यवस्था है लेकिन सरकार इसे बढ़ाकर 50 महिलाओं के रहने योग्य बनाएगी.

प्रिया के माता पिता की मांग पर इस देखभाल केंद्र का नाम प्रिया के नाम पर ही रखा जाएगा.केरल की मंत्री ने कहा कि इसमें रहने वाली महिलाओं को घर जैसा माहौल दिया जाएगा और साथ ही स्वास्थ्य सेवाएं भी दी जाएंगी.प्रिया के माता पिता ने अपने दो और घरों को सरकार को दान देने का ऑफर दिया है और इनमें से एक घर में वो रहते भी हैं.उनकी इच्छा है कि इन दोनों घरों को भी सरकार मानसिक तौर पर दिव्यांग महिलाओं के देखभाल केंद्र के तौर पर विकसित करे.

प्रिया के पिता कमलासन ने कहा कि वो अपनी बेटी के भविष्य के लिए चिंतित थे,"अगर उसे किसी रिश्तेदार की जिम्मेदारी में सौंपा जाता तो ये जरुरी नहीं था कि वो उसकी ठीक तरह से देखभाल करते. हमने बहुत से ऐसे मामले देखें हैं जिनमें रिश्तेदार संपत्ति के लालच में मानसिक तौर पर दिव्यांग लोगों को मार तक डालते हैं."

"केरल सरकार का ये फैसला हमारे लिए बड़ी राहत लेकर आया है.अब हमें अपनी बेटी के लिए परेशान होने की जरुरत नहीं है.हमारी बेटी उस घर में जल्द ही शिफ्ट हो सकती है.वो घर जैसे वातावरण में रह सकेगी अन्यथा हमारी मौत के बाद उसे बेहद परेशान होना पड़ता."

आपको बता दें कि केरल सरकार के समाज कल्याण विभाग के 2015 के एक सर्वे के मुताबिक राज्य की कुल आबादी की 2.21 फीसदी आबादी मानसिक या शारीरिक तौर पर दिव्यांग है.