कानपुर में अपराधी विकास दुबे के साथ हुई मुठभेड़ और 8 पुलिस कर्मियों के मारे जाने के बाद जिस तरह से पुलिस कार्यवाही कर रही है उससे यही लग रहा है जैसे लीपापोती की जा रही हो। चौबेपुर थाने के इंचार्ज विनय तिवारी सहित कुल चार पुलिस वाले विकास दुबे से मिली भगत करने के आरोप में ससपेंड हो चुके है। उसके बाद पूरे थाने के स्टाफ को लाइन हाज़िर कर दिया गया।

उत्तर प्रदेश एसटीएफ के डीआईजी अनंत देव को कल पीएसी में ट्रांसफर कर दिया गया। अनंत देव की फोटो विकास दुबे के लिए फाइनेंस का काम देखने वाले जय बाजपेयी के साथ वायरल हुई थी। जय बाजपेयी पर ही विकास दुबे की पत्नी और छोटे बेटे की भागने में मदद करने का आरोप है।

यही अनंत देव तिवारी कानपुर के एसएसपी हुआ करते थे और इन्ही एसएसपी साहब से मुठभेड़ में शहीद हुए डिप्टी एसपी देवेंद्र मिश्रा के साथ बातचीत का ऑडियो वायरल हुआ था जिसमे देवेंद्र मिश्रा चौबेपुर थाना प्रभारी विनय तिवारी की शिकायत करते हुए सुने जा सकते है। डिप्टी एसपी देवेंद्र मिश्र ने चौबेपुर में लाखों रूपये का जुआ पकड़ा था जिसमे विनय तिवारी पर ये आरोप लगे थे की विकास दुबे के साथ मिल कर वह इस जुए को चलाता था और एसएसपी अनंत देव से शिकायत के बाद भी विनय तिवारी पर किसी तरह की कोई कार्यवाही नहीं हुई। ऐसे आरोप लगते है की जुए का पैसा आला अफसरों तक पहुंचाया जाता था। मजे की बात ये है की कल तक ट्रांसफर होने से पहले तक अनंत देव उसी एसटीएफ को लीड कर रहे थे जो इस मामले की जाँच कर रही है।

आम तौर पर अपराधी कितना भी खूंखार क्यों न हो पुलिस पर हमला तभी करता है जब पुलिस उसके दरवाजे पर पहुंच जाए। कई अपराधी होते है जिनका पुलिस के स्टाफ से कनेक्शन रहता है और किसी भी तरह की कार्यवाही का पता लगने पर अपराधी मौके से भागने का प्रयास करता है। पर यंहा उल्टा ही केस है, थाना प्रभारी विनय तिवारी पर जैसा आरोप है की उन्होंने विकास दुबे को पूर्व सूचना दे दी की डिप्टी एसपी देवेंद्र मिश्रा दबिश देने आ रहे है वो भागने के बजाय उसने हथियार बंद आदमी बुला कर पुलिस से न सिर्फ मोर्चा ले लिया बल्कि डिप्टी एसपी देवेंद्र मिश्रा सहित 8 पुलिस के जवान शहीद कर दिए।

डिप्टी एसपी देवेंद्र मिश्रा की जिस तरह से कुल्हाड़ी से काट कर हत्या हुई, ऐसा कोई अपराधी तभी करता है जब किसी के साथ उसकी निजी रंजिश हो। सामान्य मुठभेड़ में अपराधी गोली मार कर मौके से भागने की कोशिश करेगा न की कुल्हाड़ी से हाथ पैर काटने का।

जिस तरह से घटना हुई है उससे यह जरूर प्रतीत होता है की साजिश के तहत डिप्टी एसपी देवेंद्र मिश्रा की हत्या करने का प्लान बनाया गया था। मौके पर ऐसा क्या हुआ की विकास दुबे ने मिश्रा के साथ 7 अन्य पुलिस वालों की हत्या कर दी। कुछ लोगों का यह भी मानना है की मिश्रा की हत्या के बाद मौके पर ही विकास दुबे का एनकाउंटर कर देने का प्लान था जिसका पता चल जाने पर उसने इस बड़ी घटना को अंजाम दिया।

उत्तर प्रदेश पुलिस पर जिस तरह का दबाव है उससे बहुत सम्भावना है की विकास दुबे आज नहीं तो कल मुठभेड़ में मारा जायेगा। अगर वाकई शासन की मंशा इस केस की जड़ में जाने की है तो पहले तो यह सुनिश्चित करे की विकास दुबे को जिन्दा पकड़ा जाए। साथ ही पुलिस पर जिस तरह के आरोप है ऐसे वातावरण में पुलिस के द्वारा निष्पक्ष जाँच संभव मालूम नहीं पड़ती। इसलिए या तो केस सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया जाए या एसआईटी का गठन करके जो हाई कोर्ट के मौजूदा जज के आधीन काम करे, उससे जाँच कराई जाये।