लोकसभा चुनाव में कुछ ही दिन बाकी है.ऐसे में चर्चा हो रही है की चुनाव का मुद्दा क्या हो.हर पार्टी अपनी अपनी सुविधा के हिसाब से मुद्दे तय करती है.अपने अपने वोट बैंक के आधार पर मुद्दे तय करती है.विपक्ष हमेशा मुद्देबाजी के इस खेल में हावी रहता है क्योंकि हर सरकार हर मुद्दे पर खरा नहीं उतर पाती.दरअसल अगर अंधे समर्थन और विरोध से ऊपर उठकर देखा जाए तो सरकार को असफल और सफल के सिर्फ दो चश्मों से देखने से बचा जा सकता है और शायद इसी आधार पर जनता तय कर सके की वोट किसे देना है.आज हम आपके सामने रखने जा रहे हैं उन मुद्दों को जो पिछले चुनाव के समय बेहद अहम थे और इन्हीं की वजह से यूपीए को हार का सामना करना पड़ा था.इसके बाद अगले लेख में हम इस समय के अहम मुद्दों को भी उकेरेंगे.

1.भ्रष्टाचार- 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार जिन मुद्दों पर घिरी थी उनमें भ्रष्टचार अहम था.2G,कोलगेट,रेलवे समेत कई घोटालों और मंत्रियों के इस्तीफे के बाद जनता की नजर में कांग्रेस और भ्रष्टाचार एक दूसरे के पर्याय बन गए थे.2012 में हुए अन्ना आंदोलन ने इस माहौल को और भी बढ़ावा दिया और 2014 के पहले ही कांग्रेस दिल्ली में सत्ता भी गंवा बैठी.पीएम मोदी ने उस वक्त कांग्रेस पर जमकर हमला बोला और स्विस बैंक में जमा भारतीयों के काले धन को वापस लाने की बात कही.एक बड़ा तथ्य ये भी है की आज भी कांग्रेस उन घोटालों के साये से उबर नहीं पायी है.

2.महंगाई- महंगाई की बात करें तो खुदरा सामान की कीमतें आसमान छू रही थीं.लोगों के रोजाना उपयोग में आने वाले सामान की कीमतें बहुत ज्यादा थीं.महंगाई को लेकर व्यंग लिखे जा रहे थे.फिल्में बन रहीं थीं.महंगाई की बात करें तो 2013-2014 के दौरान महंगाई दर 10.21 फीसदी तक पहुंच गई थी.बीबीसी में छपे एक लेख के मुताबिक अर्थशास्त्री डॉक्टर स्थानु आर नायर ने उस वक्त महंगाई पर लिखा ,"पिछले छः सालों के दौरान खाद्य पदार्थों में बढ़ी महंगाई पूरी तरह से अस्वीकार्य है. ऐसा तब है जबकि खाद्य कीमतों में वैश्विक स्तर पर कमी आई है.''विशेष रूप से दिसम्बर 2009 से अगस्त 2013 के दौरान अंडे, मांस और मछली, फलों, दूध, सब्ज़ियों और दूध के दामों में दस प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है. मांस और मछली के दाम में तो 17 प्रतिशत से भी ज़्यादा वृद्धि दर्ज की गई है..ऐसे में लोगों का गुस्सा सरकार से चरम पर था.पीएम मोदी और विपक्ष के तीखे हमलों ने सरकार को इस मुद्दे पर घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी.

3.महिला सुरक्षा- महिला सुरक्षा वैसे शायद ही बड़ा मुद्दा बनता लेकिन 2012 में हुए दिल्ली में निर्भया कांड ने काफी कुछ बदल दिया.एक बड़ा आंदोलन खड़ा हुआ.लोग सड़कों पर उतरे और सरकार पर गंभीर न होने का आरोप लगा.टीवी पर होने वाली बहसों मे उस वक्त सरकार के प्रवक्ता घिरने लगे.चूंकि रेप जैसे अपराध को रोकना कोई एक दो साल का काम नहीं था और वो गंभीरता भी सरकार दिखाने में नाकाम रही.ऐसे में रेप की घटनाएं रूकी नहीं और सरकार के खिलाफ महिला सुरक्षा के एक बड़ा मुद्दा चुनाव में बना

4.राष्ट्रीय सुरक्षा- 2008 के आतंकी हमलों से लेकर 2014 तक पाकिस्तान के साथ संबंध एक अहम मुद्दा बन चुके थे.चुनाव के कुछ दिन पहले दो भारतीय सैनिकों के सिर काटने की घटना ने इस मुद्दे को और भी जोर दिया.एक धारणा बनी की कांग्रेस पाकिस्तान को लेकर नरम है और वो पाकिस्तान पर कार्रवाई से डरती है.सीधे सीधे ये भी आरोप लगे की कांग्रेस ने सेना के हाथ बांध रखे हैं.वर्तमान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उस वक्त सरकार बनने पर पाकिस्तान से एक के बदले 10 सिर लाने की बात कही.पीएम मोदी ने इंटरव्यू देकर कहा की पाकिस्तान को लव लेटर लिखने बंद होने चाहिए.ऐसे में पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की मांग एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन गई और कांग्रेस को सरकार से हटाने में अहम भूमिका अदा की.