देश के पहले उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की आज जयंती है.उनके जन्मदिन पर पीएम मोदी गुजरात में स्टेचू ऑफ यूनिटी का उद्घाटन करेंगे.सरदार पटेल की 600 फुट ऊंची ये प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा होगी.सरदार पटेल ने आजादी के बाद देश में करीब 600 रियासतों के एकीकरण में अहम भूमिका अदा की थी.इसलिए उनके जन्मदिन को एकता दिवस के नाम से मनाया जाता है.पीएम मोदी ने इस प्रतिमा के निर्माण की नींव 2013 में गुजरात के पीएम रहते हुए रखी थी.सरदार पटेल की इस प्रतिमा की पूरी दुनिया में चर्चा है और इसकी एक वजह इसका आकार भी है.साथ ही पीएम मोदी जब कुछ भी करते हैं तो उसके सियासी मायने भी निकाले जाते हैं.ऐसे में न केवल देश में बल्कि विदेश में भी सरदार पटेल की इस प्रतिमा की चर्चा हो रही है.अमेरिका,चीन,ब्रिटेन और कनाडा की मीडिया ने इस प्रतिमा के अनावरण के बारे में खासा लिखा है और हम आपको बताने जा रहे हैं ये लोग इस कार्यक्रम और प्रतिमा के बारे में क्या बातें कर रहे हैं.

अमेरिका में वाशिंगटन पोस्ट-अमेरिका का वाशिंगटन पोस्ट लिखता है की इसके जरिए भारत को दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा वाला देश होने का गौरव मिलेगा.अखबार लिखता है की इस 600 फुट ऊंची प्रतिमा के जरिए भारत की वैश्विक आकांक्षाओं और इसके नेता के राजनीतिक अहम के बारे में पता चलता है.अखबार के अनुसार ये प्रतिमा पीएम मोदी के लिए बड़े राजनीतिक फायदे के लिए काम करेगी."ये प्रतिमा पीएम मोदी के हिंदू पॉलिटिकल बेस के लिए अहम कड़ी,पीएम के गृहराज्य में एक नामचीन स्थान और देश की बढ़ती संपन्नता और वैश्विक शक्ति का एक प्रतीक होगी."वाशिंगटन पोस्ट इसे पीएम मोदी के 2019 चुनावों के लिए चुनाव प्रचार की अनाधिकारिक शुरूआत भी बताता है.वाशिंगटन पोस्ट के इस विश्लेषण को कनाडा के नेशनल पोस्ट समेत दुनिया के कई समाचार पत्रों ने जगह दी है.

पाकिस्तानी मीडिया में जहां प्रमुख अखबार डॉन ने वाशिंगटन पोस्ट के विश्लेषण को ही जगह दी है.वहीं न्यूज चैनल जियो न्यूज ने इसे राष्ट्रवाद का विस्फोट बताया है.चैनल के अनुसार भारत में अगले साल चुनाव होने वाले हैं और इसके मद्देनजर ये बड़ा प्रोजेक्ट एक राजनीतिक कदम है.चीन के साउथ चाइना पोस्ट ने अंतर्राष्ट्रीय न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट को प्रमुखता दी है.साउथ चाइना पोस्ट ने लिखा है की सरदार पटेल की ये प्रतिमा जल्द ही महाराष्ट्र में बन रहे शिवाजी स्मारक से लंबाई के मामले में पिछड़ जाएगी.

ब्रिटिश मीडिया में बीबीसी ने प्रतिमा का विरोध कर रहे लोगों के पक्ष को प्रमुखता से दिखाया है.बीबीसी ने एक स्थानीय किसान के हवाले से लिखा है की सरकार को एक प्रतिमा पर इतना खर्च करने के बजाय नर्मदा जिले के किसानों पर करना चाहिए.बीबीसी 2016 की उस सरकारी रिपोर्ट का हवाला भी देता है जिसमें बताया गया है की नर्मदा जिले में तमाम लोग आज भी खाने को तरस रहे हैं.