हाल ही में बिहार में चमकी बुखार बच्चों पर कहर बनकर टूटा. बिहार में 150 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई. इस दौरान बीमारी से निपटने के लिए सरकारी प्रयासों में कमी की बात सामने आई है. इस दौरान बिहार में डॉक्टरों की कमी की बात सामने आई. तमाम बच्चों पर एक डॉक्टर इलाज कर रहे थे. ऐसे में महामारी से निपटना मुश्किल हो गया. अंतर्राष्ट्रीय संस्था आर्थिक विकास और सहयोग संगठन की रिपोर्ट में भी भारत में डॉक्टरों की कमी सामने आई है.

आर्थिक विकास और सहयोग संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में भारत में 1000 लोगों पर .7 डॉक्टर ही काम करते हैं. विश्व में महाशक्ति माने जाने वाले अमेरिका की हालत भी इस मामले में अच्छी नहीं है. यहां भी प्रति 1000 लोगों पर 2.5 डॉक्टर ही काम करते हैं. हालांकि भारत के मुकाबले अमेरिका की हालत काफी बेहतर है. अन्य एशियाई देशों में साउथ कोरिया की हालत भी हमसे बेहतर है. यहां 2.3 डॉक्टर एक हजार लोगों पर काम करते हैं. साउथ कोरिया अमेरिका से थोड़ा ही पीछे है.

ऑस्ट्रिया में स्वास्थ्य सेवाएं काफी बेहतर हैं. डॉक्टरों की संख्या के मामले में ये देश नंबर एक पर है. यहां प्रति 1000 हजार लोगों पर 5.1 डाक्टर काम करते हैं. दुनिया के सबसे सुखी देशों में गिने जाने वाले नार्वे की हालत भी काफी अच्छी है. ये देश दूसरे नंबर पर है. यहां प्रति 1000 लोगों पर 4.4 डॉक्टर काम करते हैं. इसके बाद स्विट्जरलैंड का नंबर आता है जहां 4.2 डाक्टर हर 1000 लोगों पर काम करते हैं. इन देशों के बाद डॉक्टरों की संख्या के मामले में स्विट्जरलैंड, जर्मनी और रूस का नंबर आता है.

डॉक्टरों की कमी हमारे लिए एक चिंता की बात है. वैसे तो हमें कम संसाधनों में रहने की आदत हो चुकी है लेकिन जब कोई महामारी या अन्य तरह का संकट आता है तो हमारे सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो जाती है. डॉक्टरों की कमी के साथ साथ हमारे सामने एक संकट जनसंख्या का भी है. ज्यादा जनसंख्या के सामने हम किस तरह से संसाधनों को पूरा कर सकते हैं. हमें इन सभी बिंदुओं पर काम करने की जरूरत है.