दुनिया भर में कोरोना वायरस के संक्रमण की संख्या तेजी से बढ़ रही है। खासतौर से अमेरिका, भारत, ब्राज़ील और मेक्सिको इन देशों में संक्रमण सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है। हलाकि कई अन्य देश ऐसे भी है जंहा संक्रमण की रफ़्तार लगभग इन देशों जैसी ही है पर समय पर परिक्षण न होने की वजह से असल आंकड़े सामने नहीं आ पा रहे है।

कुछ देश ऐसे भी है जंहा पर संकरण की रफ़्तार धीमी पड़ी है। यूरोप में इटली, स्पेन, फ्रांस, जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम ये ऐसे देश है जंहा रोज होने वाली मौतों और संक्रमण में पहले की तुलना में काफी कमी आयी है। काफी सारे लोग ऐसे है जिनके मन में ये सवाल उठ रहा है की क्या इस महामारी की दूसरी लहर भी आएगी या अमेरिका में बढ़ते केस दूसरी लहर की निशानी है या पहली लहर ख़त्म हो चुकी है।

महामारी में लॉकडाउन की मार झेल रहा उद्योग जगत दूसरी लहर की बात सुन कर ही चिंतित है। काफी उद्योग धंधे पहले ही बर्बाद होने की कगार पर है ऐसे दोबारा महामारी को झेल पाना कई कंपनियों के लिए शायद मुश्किल ही होगा। ऐसे में अमेरिका को जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी में संक्रामक रोग की विशेषज्ञ डॉक्टर लीसा मरकागिस, ने एक लेख में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला है।

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क्या कोरोना वायरस संक्रमण की पहली लहर ख़त्म हो चुकी है

डॉक्टर लीसा का कहना है नहीं कोरोना वायरस संक्रमण की पहली लहर अभी खत्म नहीं हुई है। असल में ये अभी एक लहर जैसा न हो कर एक बड़ी रजाई पर लगे हुए छोटे छोटे कई सारे पैबंद जैसा है। एक ही देश में कई शहर ऐसे है जंहा संक्रमण चरम पर पहुंच चुका है जबकि बहुत सी जगह ऐसे है जंहा संक्रमण की दर अभी भी काफी कम है। जिन शहरों में आबादी घनी और लोग ज्यादा पास पास रहते है वंहा इसकी रफ़्तार तेज है। कुछ ऐसे शहर भी है जंहा काफी बड़े पैमाने पर लोगो के संक्रमित हो जाने की वजह से रफ़्तार में पहले की तुलना में काफी कमी आयी है जैसे न्यूयोर्क। भारत में दिल्ली में भी संक्रमण की रफ़्तार में कुछ गिरावट आयी है।

अचानक से संक्रमण की दर में तेजी क्यों आयी है

लॉकडाउन के बाद जैसे जैसे बाजार को खोला गया और अन्य गतिविधियां लोगो ने शुरू की पर किसी विशेष दवाई या वैक्सीन की उपलब्ध न होने की वजह से संक्रमण की दर में तेजी आना लाज़मी है। सामान्य गतिविधियों के बीच लोगों से ये अपेक्षा की जा रही थी की लोग सोशल डिस्टन्सिंग का पालन करेंगे, मास्क पहन कर रखेंगे और समय समय पर साबुन से हाथ साफ़ करते रहेंगे। पर जो लोग पिछले कई महीने से इन नियमों का पालन कर भी रहे थे उन्होंने भी इनमे ढिलाई करना शुरू कर दिया।

इसके अलावा वायरस से संक्रमित होने के बाद भी काफी लोगों में इसके लक्षण नहीं आते जिससे वो व्यक्ति अनजाने में ही काफी सारे लोगों को वायरस से संक्रमित कर देता है। जिन व्यक्तियों में संक्रमण के बाद लक्षण भी आते है उन्हें भी आने में 2 हफ्ते का समय लगता है। लक्षण प्रकट होने से पहले वह एक व्यक्ति कई सारे लोगों को संक्रमित कर चुका होता है।

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क्या गर्म मौसम ने वायरस के संक्रमण पर किसी तरह का कोई असर डाला है

डॉक्टर लीसा कहती है की अभी तक बड़े स्तर पर ऐसे कोई स्टडी नहीं हुई है जिससे की ये पता लग सके की गर्म मौसम का वायरस के संक्रमण पर क्या प्रभाव पड़ा है। कुछ छोटे स्तर पर किये गए अध्ययन से ये सामने आया है की गर्म मौसम की वजह से लगभग 20 प्रतिशत की कमी आयी है। पर गर्म मौसम से वायरस संक्रमण रुकने वाला नहीं है।

दूसरी लहर की वजह से विशेषज्ञ क्यों चिंतित है और क्या यह पहले से ज्यादा खतरनाक होगी

विशेषज्ञों का मानना है की कोरोना वायरस की अगले लहर सितम्बर से शुरू हो सकती है और ऐसे में लोगों का व्यवहार ये तय करेगा की ये कितनी खतरनाक हो सकती है। काफी समय से लोग घरों में है या कम निकल रहे है ऐसे में लोगों के अंदर कुंठा का भाव आ रहा है ऐसे में अगर लोगों ने सोशल डिस्टन्सिंग का पालन करना बंद कर दिया या अन्य नियमों का सही से पालन नहीं किया तो बहुत संभव है की महामारी विकराल रूप ले ले।

शुरुआत में संक्रमण की संख्या कम होने से लोगों को एकांत में रखना और उनके संपर्क में आये लोगों का पता लगाना आसान था पर जैसे जैसे संक्रमण आम लोगों में फैल जायेगा यही काम बेहद कठिन या कह सकते है की असंभव हो जायेगा।

वायरस के फैलाव के साथ ही काफी सारे लोग हॉस्पिटल जाने से भी बच रहे है। ऐसे में वो बच्चे जिन्हे रूटीन वैक्सीन लगनी थी वो भी समय पर नहीं लग पा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में बच्चो में खसरा, काली खांसी जैसे रोग जिन्हे वैक्सीन से रोक लिया जाता था वो फिर से देखे जा सकते है।