चीन के साथ पश्चिमी लदाख में चल रहा तनाव भले ही कुछ कम होता नजर आ रहा है और ज्यादातर मोर्चे पर चीन की सेना पीछे जरूर हटी है पर सेटलाइट से मिली ताजा तस्वीरें दूसरी तरफ ही इशारा कर रही है। तनाव के बीच की यह शांति आने वाले सर्दी के मौसम में कितनी टिक पायेगी देखने वाली बात है।

ख़ुफ़िया उपग्रह से मिली तस्वीरों के अनुसार चीन के सेना से तिब्बत के इलाके में काफी बड़ी संख्या में तैनाती कर रखी है। साथ ही अरुणाचल से सटे हुए हिस्से में भी चीन की सेना ने बड़ी संख्या में जमावड़ा कर रखा है। चीन ने जिस तरह से शुरुआत में काफी आक्रामक रुख दिखाया था और उसके धीमे धीमे बातचीत के बाद पीछे खिसकना शुरू किया। उससे ऐसा लगता है जैसे चीन भारत को टेस्ट करना चाहता था की भारत किस तरह का रुख अपनायेगा।

चीन हमेशा से जानता रहा है की मौजूदा समय में भारतीय सेना पहाड़ो की लड़ाई में दुनिया की सबसे अनुभवी और ताकतवर सेना है। पर वह ये भी जानता है की भारतीय नेतृत्व हमेशा से पहले हमला करने जैसे निर्णय लेने में पीछे रहा है। पिछले कई सालों में सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट में हवाई हमले जैसे निर्णय लेने की वजह से चीन मौजूदा नेतृत्व को टेस्ट करना चाहता था। गलवान घाटी में हुआ संघर्ष उसी टेस्ट का परिणाम है।

हलाकि संघर्ष के बाद भारत के नेतृत्व ने हथियार खरीदने और सेना के आधुनिकी करण में तेजी जरूर दिखाई पर चीन की आक्रामकता के बावजूद भारतीय नेतृत्व अपने पूर्व के राजनेताओं से अलग नहीं दिखा। गलवान घाटी में हुए संघर्ष से चीन ने न सिर्फ भारतीय नेतृत्व को परख लिया साथ ही भारतीय सेना की तैयारी को परख लिया।

मौजूदा तनाव में कमी बातचीत के जरिये चीन के द्वारा अपनी तैयारी को और पुख्ता करने के लिए लिया गया समय जैसा लगता है। साथ ही बातचीत में भी उसने भारतीय सीमा के अंदर ही बफर जोन बना देने में भी सफलता प्राप्त कर ली।। आने वाले सर्दी के महीने भारत के लिए बेहद महत्त्पूर्ण होने वाले है। आधुनिक उपग्रहों और तमाम दूसरी तैयारी के बाद भी भारत अभी भी तकनीकी रूप से इतना सक्षम नहीं है की पूरी सीमा की लगातार निगरानी रख सके।

सर्दियों में जब पहाड़ बर्फ से ढके हुए होंगे और अपनी ही सीमा में बफर जोन बनाये हुए भारत के सैनिक सीमा की एक निश्चित दूरी तक ही जा पाएंगे। ऐसे में मौके का फायदा उठाकर चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा को बिना किसी लड़ाई के बदल सकता है। सर्दियों में तापमान जब शुन्य से 50 डिग्री तक नीचे चला जाता है ऐसी विषम माहौल में बहुत बड़ी संख्या में सैनिक बनाये रखना भी बड़ी चुनौती होगी। साथ ही हथियारों की क्षमता पर भी असर पड़ेगा। कितने हथियार ऐसे विषम माहौल में पूरी तरह से काम कर पाते है।

इसके विपरीत चीन अगर वाकई इस तरह की योजना पर काम कर रहा है तो उसकी तैयारी भी उस स्तर की होगी। हाल ही में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का वो इलाका जो लदाख से सटा हुआ है स्कार्दू, वंहा पर पाकिस्तान के अलावा चीनी सेना की गतिविधियां भी देखी गयी है। पाकिस्तान ने अपनी वायुसेना की और थल सेना दोनों की ही तैनाती इलाके में बढ़ाई है।

सियाचिन और शक्सगम वैली ये दो इलाके ऐसे है जंहा पर भारत, पाकिस्तान और चीन की सीमाएं मिलती है। बीते कई महीनों से चीनी सेना के कई ख़ुफ़िया संदेशो को पकड़ने के बाद चीन की कश्मीर में आतंकवाद में बढ़ावा देने में भूमिका भी सामने आयी है। ऐसे में पाकिस्तान और चीन मिलकर सियाचिन और लदाख के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर सकते है।