हैदराबाद में 27 वर्षीय महिला पशु चिकत्सक के साथ गैंगरेप और उसके बाद जलाकर हत्या कर देने के मामले में आम आदमी से लेकर और नेता तक सभी आक्रोश में है। कई लोग कह रहे है इन्हे जला कर मार देना चाहिए। सांसद जया बच्चन ने राज्यसभा में इस मामले पर बोलते हुए कहा की आपराधियों की मॉब लिंचिंग यानी की आम जनता कुचल कर मार दे।

आप इस तरह के बयान दे कर मीडिया में और आम पब्लिक के बीच सुर्खियां अवश्य बटोर सकते है क्यों की हर व्यक्ति घटना से आक्रोशित है पर क्या कानून से चलने वाले किसी देश में इस तरह से न्याय हो सकता है। वास्तविकता में देश की कानून व्यवस्था पूरी तरह से दम तोड़ चुकी है। जब भी कोई इस तरह का भयावह मामला सोशल मीडिया में आता है तो हर बार मांग होती है की नया कानून बनाया जाये।

बहुचर्चित निर्भया गैंगरेप के केस के बाद कानून में बदलाव लाया गया पर उससे फायदा क्या हुआ। कानून का फायदा तो तब हो सकता है जब उसका उपयोग किया गया हो। घटना के 8 साल गुजर जाने के बाद और सुप्रीम कोर्ट से फांसी की सजा मिलने के बाद भी आज तक आपराधियों को फांसी पर नही लटकाया जा सका है। किसी भी सजा के लिए कोई समय सीमा जैसा नियम है ही नही। चलती का नाम गाड़ी जैसे धीमे धीमे मामला चल रहा है। एक दिन फिर से अपराधी पुनर्विचार याचिका डाल देंगे और मामला फिर लटक जायेगा।

जिस केस को आपराधियों के लिए एक नजीर बना के पेश करना था जब उस केस में ये हाल है तो बाकी आपराधों को तो भूल ही जाये। 10-12 साल में अगर न्याय मिल भी जाये तो मीडिया में Justice delayed Justice denied जैसे स्लोगन चला कर एक दो दिन बढ़िया से स्टोरी चलेगी। फिर कुछ दिन फांसी की रस्सी कंहा से बनी थी और कौन सा खानदानी जल्लाद आया था फांसी देने, यही सब चला कर सब अपना अपना पल्ला झाड़ के बैठ जायेंगे गिद्ध की तरह अगले केस की तलाश में। आम जनता का भी वही हाल है सोशल मीडिया पर मोमबत्ती लेकर फोटो डालनी हो या रेस्ट इन पीस का मैसेज लिखना हो उससे ज्यादा कुछ करने की न तो कोई चाह है न हिम्मत। और कोई करें भी तो क्यों करें अपने परिवार के सदस्य के साथ तो कुछ हुआ नही है जब होगा तब देखेंगे।

सरकार लाखों करोड़ो के विकास कार्य के दावे करती है। जब देश के आपराधियों में कानून का डर ख़त्म हो चुका हो ऐसे में सरकार का काम मिशन मोड में कानून व्यवस्था को सही करना होना चाहिए। केंद्र सरकार कानून व्यवस्था को राज्य सरकार की जिम्मेदारी कह कर अपना पल्ला झाड़ लेती है। यह सही है की कानून व्यवस्था बनाये रखना राज्य सरकार का काम है पर केंद्र सरकार अपनी तरफ से पहल करके सुप्रीम कोर्ट के जजों के साथ बात करके देश भर में बड़े पैमाने पर अदालतों का गठन कर सकती है। बड़े पैमाने पर जजों की भर्ती की जाए। जब आप की जनसँख्या और आपराधों की संख्या इतनी ज्यादा है तो कम से कम हर 2 मंडल स्तर पर हाईकोर्ट बनाये जाये और हर प्रदेश में एक सुप्रीम कोर्ट बनाया जाये।

समयबद्ध तरीके से हत्या, बलात्कार और संगीन अपराधों की सुनवाई हो और अपराध के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान किया जाये। 10 केस में अगर 1 साल के अंदर कानूनी प्रक्रिया पूरी करके फांसी की सजा दे दी जाएगी आप विश्वास करें इस तरह के आपराधों पर लगाम लगना शुरू हो जायेगा। हर अपराधी जानता है की वो अपराध करके बच जायेगा, जब उसकी ये सोच बदलने लगेगी, अपराध अपने आप कम होने लगेंगे।

पर न तो मौजूदा सरकार और न ही पूर्व की अन्य दलों की सरकारों ने इस क्षेत्र में काम करने को लेकर कोई गम्भीरता दिखाई है। अगर आप अपने देश की कानून व्यवस्था सही से बना कर नही रख सकते है तो आप चाहे लाख बुलेट ट्रेन चलाये और स्मार्ट सिटी बना डाले, देश तरक्की नही कर सकता।