हिमालय में दूध, दूध से बने उत्पादों, यातायात और ऊन का मेन स्त्रोत याक इन दिनों संकट में है. सिक्किम की राजधानी गंगटोक से 70 किलोमीटर दूर हिमालय की एक घाटी में क्षेत्र में तेज बर्फबारी से याक खाने कमी से प्रभावित हो रहे हैं और इनकी मौत हो रही है. बीते दिनों ऐसे ही हालात में 300 से ज्यादा याक की मौत हो गई. स्थानीय लोगों के मुताबिक सरकार भी ऐसे हालात में कोई मदद नहीं कर पा रही है.

समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक सिक्किम में इन घाटियों में जबरदस्त बर्फबारी हो रही है और मैदान बर्फ से ढके नजर आ रहे हैं. ऐसे मौसम में जानवरों के लिए खाना ढूंढना एक चुनौती साबित हो रहा है. स्थानीय लोगों के मुताबिक घाटी में इन दिनों 1500 से ज्यादा याक फंसे हुए हैं. स्थानीय नागरिक राज कुमार यादव के मुताबिक, "हमने उन तक पहुंचने के काफी प्रयास किए. न सड़क का रास्ता साफ है और न ही हवाई रास्ते से पहुंचा जा सकता है.मौसम के हालात खराब हैं. हम वहां पहुंचे तब तक 300 याक की मौत हो चुकी थी."

यादव आगे बताते हैं, "एक और स्थानीय परिवार के मुताबिक घाटी में 500 से ज्यादा याक की खाना न मिलने से मौत हो चुकी है." यादव के मुताबिक 50 से ज्यादा याक का इन दिनों इलाज किया जा रहा है. यादव बताते हैं कि हर साल यहां मौसम की वजह से लोगों की मौत होती है लेकिन इस बार का आंकड़ा बहुत ज्यादा है. यादव बताते हैं, "मौसम बेहद ही खराब था. दिसंबर में एक बड़ी बर्फबारी के बाद यहां कई बार तेज बर्फबारी हुई. ऐसे में घास भी उग नहीं पाई. याकों की मौत ठंड और भूख दोनों से हुई है.

सरकार याकों के शवों को दफनाने का इंतजाम कर रही है. साथ ही स्थानीय परिवारों की मदद कर रही है. हिमालयी क्षेत्र में याक लोगों के जीवन यापन का एक अहम हिस्सा हैं.