लोकसभा चुनाव के चार चरण का चुनाव हो चुका है. तीन चरणों में मतदान होना अभी बाकी है. बुंदेलखंड भी उन क्षेत्रों में शामिल हैं जहां अभी मतदान बाकी है. यहां आने वाली 12 मई को वोट डाले जाएंगे. बुंदेलखंड का नाम सुनते ही हमारे जहन में एक बदहाली की तस्वीर उभरती है. ये तस्वीर कोई भ्रम नहीं आज भी एक सच है. बुंदेलखंड के लोगों के लिए पानी आज भी बड़ा मुद्दा है और वो इसी के नाम वोट करने की बात भी कर रहे हैं.

हम आपको ले चल रहे हैं बुंदेलखंड के भी सबसे तुच्छ समझे जाने वाले इलाकों में एक खजुराहो. खजुराहो की गिनती सबसे एतिहासिक शहरों में होती है. यहां के कई हिंदू और जैन मंदिरों को यूनेस्को ने विश्व की विरासतों में जगह दे रखी है. एमपी के इस शहर के मतदाता क्षेत्र में पानी का संकट, विकास की धीमी गति और शहर के हालात बदलने के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी होने की बात कहते हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में यहां रहने वाले त्रिपाठी कहते हैं, "सरकार किसी की भी बनी हो, यहां ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है. हम दो दशक पहले इससे बेहतर थे". हर जगह की तरह यहां भी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की अलग अलग समस्याएं हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की कमी, खराब सड़कें और शिक्षा की हालत खराब है. शहरी क्षेत्रों में रोजगार और कस्बों से कनेक्टिविटी न होने की समस्याएं बड़ी हैं. यहां के युवा नेता योगेंद्र चहल के मुताबिक यहां अच्छे अस्पतालों की बेहद कमी है. वो कहते हैं, "यहां कोई अच्छे अस्पताल नहीं है. घायलों को इलाज के लिए एक घंटे के सफर पर छतरपुर ले जाना पड़ता है. अगर वहां भी अस्पताल में सही इलाज नहीं मिल पाता तो 8 घंटे के रास्ते पर भोपाल जाना पड़ता है. अधिकतर मामलों में घायल रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं."

कहने को तो खजुराहो में हवाई अड्डे को अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का दर्जा हासिल है लेकिन एक होटल के जनरल मैनेजर नारायण सिंह बायल के मुताबिक यहां हफ्ते में महज तीन फ्लाइट आती हैं.टूरिस्ट गाइड फेडरेशन के वाइस प्रेसिडेंट राजेश तिवारी के मुताबिक यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में 35 फीसदी की गिरावट हुई है.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक यहां भी स्थानीय बनाम राष्ट्रीय मुद्दे पर बात हो रही है. बीजेपी उम्मीदवार विष्णु दत्त शर्मा यहां आंतरिक सुरक्षा और पाकिस्तान को मजा चखाने का जिक्र कर रहे हैं. यहां रहने वाले एक रियल स्टेट एजेंट नीरज राटौरिया कहते हैं, "संघ के दबाव में विष्णु शर्मा को टिकट मिला है. बुंदेलखंड को एक आवाज उठाने वाले नेता की जरूरत है. पिछली बार उमा भारती ने ये काम किया था. उनके अलावा कोई भी नेता इस क्षेत्र में नहीं है."

आपको बता दें कि खजुराहों में बीजेपी 1989 से लगातार चुनाव जीत रही है. सिर्फ 1999 में उसे कांग्रेस के सत्यव्रत चतुर्वेदी से हार का सामना करना पड़ा था. खजुराहो के अलावा टिकमगढ़, दमोह और सागर में भी बीजेपी का प्रभाव अच्छा है.