1. यूपी में 25 हजार होमगार्ड को सरकार ने दीवाली का तोहफा दिया है. इनकी सेवाएं कल से समाप्त कर दी गईं. पुलिस थानों से लेकर ट्रैफिक तक में इनकी भूमिका थी. सरकार का कहना है कि इनकी जगह सिपाहियों की भर्ती की जाएगी. पुराने रिकार्ड के हिसाब से ये भर्ती 2-3 साल से पहले तक तो संभव नहीं दिखती. सरकार ने होमगार्ड के साथ साथ प्रदेश की सुरक्षा भी भगवान भरोसे छोड़ दी है. हालांकि मीडिया में खबर चलने की बाद बढ़ते दबाव के चलते सरकार ने ये फैसला फिलहाल टाल दिया है।

2. महाराष्ट्र में पीएमसी बैंक के एक खाताधारक संजय गुलाटी की विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई. संजय के 90 लाख रुपये बैंक में जमा थे. इससे पहले जेट एयरवेज से उनकी नौकरी चली गई थी.

यूपी के होमगार्ड की चर्चा कहीं नहीं होगी. फिलहाल इधर कोई चुनाव नहीं है. ये प्रदर्शन करेंगे तो ज्यादा से ज्यादा किसी अखबार के पन्ने पर खबर छप जाएगी. प्रदर्शन के दौरान लाठी चल गई तो हो सकता है कि कोई न्यूज चैनल दिखा दे. महाराष्ट्र में चुनाव है तो वित्त मंत्री ने मुंबई में बयान दिया. बयान में साफ था कि सरकार का पीएमसी बैंक से कोई लेना देना नहीं है लेकिन( चूंकि चुनाव है इसलिए) वित्त मंत्रालय ये सुनिश्चित करेगा कि ग्राहकों की चिंताएं दूर हों. अधिकतर सरकारों का देश में यही हाल है. आप कमाते हैं तो सरकार टैक्स लेती है लेकिन आपकी नौकरी सुरक्षित रहे इसके लिए सरकार कुछ नहीं करती. जनता की भलाई के नाम पर कानून बनते हैं लेकिन उऩ कानूनों में जनता के लिए ही कोई जगह नहीं होती. बस लोग मूर्ख बनते रहें इसलिए एक दो लालीपॉप टाइप के प्रावधान लाए जाते हैं.

सत्ता तो मस्त है ही लेकिन जो सत्ता से बाहर हैं, उनकी हालत सत्ता से भी खराब है. उन्हें अपना ही होश नहीं है वो जनता का क्या ख्याल करेंगे. लोकतंत्र के नाम का एक पर्दा यहां डाला गया है जिसके पीछे छिपकर जो कांड करना चाहो वो कर लो. इस सबका हल मुझे भी नहीं पता. बस इतना पता है कि जिस चुनाव के जरिए हमें परिवर्तन का रास्ता दिखाया जाता है, वो इसका हल नहीं रह गया है. हालत उससे कहीं खराब है.