लोकसभा चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान कल होने वाला है.यूपी की 8 सीटों के लिए भी इस चरण में मतदान होना है.इन आठ सीटों में पश्चिमी यूपी की 7 और गौतमबुद्धनगर सीट पर मतदान होना है.लोकसभा चुनाव के लिहाज से सभी पार्टियों के लिए ये 8 सीटें बड़ी भूमिका तय करती हैं.बीते चुनाव में बीजेपी ने इन सीटों पर बड़ी जीत हासिल की थी और सभी सीटें अपनी झोली में डाली थीं.हालांकि सांसद हुकुम सिंह के निधन के बाद हुए उपचुनाव में महागठबंधन से एसपी के टिकट पर तबस्सुम हसन ने कैराना सीट पर कब्जा कर लिया था.

भले 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी का जलवा रहा हो लेकिन इस चुनाव में चुनौती अलग है.बीएसपी,एसपी और रालोद के गठबंधन ने बीजेपी की राह मुश्किल की है.यहां तक की बागपत और मुजफ्फरनगर में तो इस बार कांग्रेस का भी उम्मीदवार नहीं होगा.कैराना के उपचुनाव ने बीजेपी को दिखाया था कि कैसे महागठबंधन आगामी लोकसभा चुनाव में उनके सामने परेशानियां खड़ी करने वाला हैं.आज हम आपके पेश करने वाले हैं इन सीटों का चुनावी गणित,जिसके जरिए आप कुछ हद तक लोकसभा चुनाव के परिणाम के बारे में अंदाज लगा सकते हैं.

सहारनपुर-सहारनपुर में बीते लोकसभा चुनाव में बीजेपी के राघवलखनपाल सिंह ने जीत हासिल की थी.इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के इमरान मसूद को हराया था.मुजफ्फरनगर दंगों के बाद कांग्रेस के इमरान मसूद की एंट्री ने चुनाव को पूरी तरह से बीजेपी बनाम कांग्रेस बना दिया था.मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपी राघवलखन पाल इस चुनाव में भारी पड़े और करीब 70 हजार वोटों से जीतने में कामयाब रहे. बीजेपी के राघवलखनपाल को चुनाव में 472,999 वोट मिले थे.इमराम मसूद को 407,909 वोट चुनाव में मिले थे जबकि बीएसपी के जगदीश सिंह राणा को 235,033 वोट हासिल हुए थे. इस बार बीजेपी और कांग्रेस ने जहां अपने उम्मीदवार पिछली बार की तरह बरकरार रखे हैं वहीं महागठबंधन ने हाजी फजलुर्रहमान को मैदान में उतारा है.

अगर सीट पर वोटरों की बात करें तो यहां 17,22,580 वोटर हैं.इनमें करीब छह लाख मुस्लिम, साढ़े तीन लाख दलित, पचास हजार के करीब जाट मतदाता हैं.बीते 6 अप्रैल को यहां महागठबंधन की एक संयुक्त रैली हुई. इस रैली में बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने मुस्लिमों से एक साथ बीएसपी को वोट देने की अपील की.इसके बाद वो चुनाव आयोग के भी निशाने पर आ गईं. दरअसल दो मुस्लिम उम्मीदवारों ने यहां बीजेपी की राह आसान की है.ऐसे में महागठबंधन को वोटों के बंटवारे का डर सता रहा है.गठबंधन के साथ दलित,मुस्लिम और जाट तीनों का वोट बैंक नजर आ रहा है.वहीं इमराम मसूद की पकड़ मुस्लिम वोटरों पर मजबूत है.बीजेपी की उम्मीद भी कहीं न कहीं मुस्लिम वोटरों के बंटवारे पर टिकी है.अगर सहारनपुर में मुस्लिम वोट बंटते हैं तो यहां बीजेपी के लिए सीट बचाना ज्यादा मुश्किल नहीं होने वाला है.

बिजनौर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ये सीट अब तक सबसे खास सीटों में रही है.दरअसल यहां से बीएसपी सुप्रीमो मायावती और लोक जनशक्ति पार्टी के रामविलास पासवान चुनाव लड़ चुके हैं.बीते चुनाव में यहां से अभिनेत्री जया प्रदा ने रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ा था.हालांकि उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा था.बीते चुनाव में यहां से बीजेपी के कुंवर भारतेंदु ने चुनाव जीता था.उन्होंने सपा के शहनवाज राणा को 2 लाख से ज्यादा वोटों से हराया था.बीएसपी के मलूक नागर को इस चुनाव में तीसरे स्थान पर रहना पड़ा था.भारतेंदु को चुनाव में 486913 वोट,शहनवाज राणा को 281136 जबकि मलूक नागर को 230124 वोट चुनाव में हासिल हुए.

43 फीसदी मुस्लिम आबादी वाली इस सीट पर इस बार समीकरण अलग हैं.बीजेपी ने यहां अपने सांसद का टिकट बरकरार रखा है.बीएसपी के उम्मीदवार मलूक नागर इस बार महागठबंधन के उम्मीदवार हैं लेकिन जिस शख्स ने यहां के चुनाव में जान फूंकी है वो हैं नसीमुद्दीन सिद्दीकी.अगर पिछले चुनाव में मिले वोटों को देखें तो नागर की राह आसान दिख रही थी लेकिन बीएसपी छोड़कर कांग्रेस में जाने वाले नसीमुद्दीन सिद्दिकी ने यहां से सीधे तौर पर महगठबंधन के लिए चुनौती खड़ी कर दी है.निश्चित तौर पर मुस्लिम वोट यहां बंटेगा.दूसरी तरफ शिवपाल की पार्टी प्रसपा से यहां ईम सिंह गुर्जर मैदान में हैं.ऐसे में महागठबंधन का कुछ वोट वो भी काटेंगे.मुजफ्फरनगर दंगों के एक आरोपी रहे भारतेंद सिंह को एक बार फिर से चुनाव जीतने के लिए मोदी के नाम का सहारा होगा.हालांकि 2014 के मुकाबले कमजोर पड़ी मोदी लहर से भी ज्यादा वो विपक्षी वोटरों के बंटवारे पर उम्मीद लगाए होंगे.अभी जिस तरह विपक्षी उम्मीदवार सामने हैं उसे देखकर लगता है की बीजेपी बिजनौर की इस सीट को भी बचाने में कामयाब हो सकती है.