लोकसभा चुनाव के लिए पहले चरण के मतदान हो चुका है.अब 18 अप्रैल को दूसरे चरण के लिए मतदान होगा.राजनीतिक पार्टियां दूसरे चरण के मतदान के लिए तैयारियों में जुटी हुई हैं.यूपी में दूसरे चरण में भी आठ सीटों पर मतदान है.ये सीटें नगीना, बुलंदशहर, आगरा और हाथरस,अमरोहा, अलीगढ़, मथुरा और फतेहपुर सीकरी हैं. इनमें से नगीना,बुलंदशहर,आगरा और हाथरस सुरक्षित सीटे हैं.इनमें से नगीना सबसे नई सीट है.ये सीट नए परिसीमन के तहत 2009 में अस्तित्व में आई थी.आज हम आपको इसी नगीना सीट के राजनीतिक समीकरण के बारे में बताएंगे.

जैसा कि हमने पहले ही आपको बताया कि नगीना लोकसभा सीट 2009 में अस्तित्व में आई थी.नगीना पहले बिजनौर लोकसभा सीट का हिस्सा थी.पहले चुनाव में इस सीट पर सपा ने जीत हासिल की थी.2014 में हुए दूसरे चुनाव में इस सीट पर मोदी लहर में बीजेपी ने जीत हासिल की थी.नगीना मुस्लिम बहुल क्षेत्र है.दूसरे नंबर पर यहां दलितों की आबादी है.2014 के चुनाव की बात करें तो बीजेपी के यशवंत सिंह ने जीत हासिल की थी.उन्होंने उस वक्त सांसद रहे सपा के यशवीर धोबी को मात दी थी.उनके बाद तीसरे नंबर पर बीएसपी के गिरिश चंद्र थे.चुनाव में यशवंत ने करीब 1 लाख वोटों के अंतर से सपा के उम्मीदवार को हराया था.यशवंत को चुनाव में 367,825 यानि करीब 39 फीसदी वोट मिला था.दूसरी तरफ एसपी के यशवीर को 275,435 यानि 29.2 फीसदी वोट मिले थे,जबकि बीएसपी उम्मीदवार गिरिश चंद्र को 245,685 यानि 26.1 वोट हासिल हुए थे.

बीजेपी ने यहां विरोध के बावजूद मौजूदा सांसद यशवंत पर ही भरोसा जताया है.बीते चुनाव में तीसरे स्थान पर बीएसपी के गिरिश चंद्र इस बार महागठबंधन के उम्मीदवार हैं.वैसे ये चुनाव सीधे तौर पर बीजेपी और महागठबंधन के बीच होने वाला था लेकिन कांग्रेस ने यहां मजबूत उम्मीदवार उतार कर मुकाबले को रोचक बना दिया है.कांग्रेस ने ओमवती जाटव को उम्मीदवार बनाया है.वो कुछ ही दिन पहले बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुईं थीं.वो चार बार की पूर्व विधायक हैं,मायावती सरकार में मंत्री रही हैं और बिजनौर से सांसद भी रही हैं.क्षेत्र में उनकी पकड़ मजबूत है.प्रियंका गांधी ने बीते दिनों पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सहरानपुर,बिजनौर और नगीना के प्रत्याशियों के लिए रोड शो भी किया था.बाकी दोनों उम्मीदवार अपनी अपनी पार्टियों में ही विरोध का सामना कर चुके हैं.यशवंत तो दलितों के मुद्दे पर बीजेपी को ही घेर भी चुके हैं.हालांकि उनका टिकट बरकरार है.

अगर क्षेत्र में मतदाताओं के बारे में बात करें तो यहां 14,93,411 मतदाता हैं.इनमें से 6 लाख मतदाता मुस्लिम हैं, 3 लाख मतदाता दलित हैं.इनके अलावा 1.5 लाख वोटर सवर्ण हैं.बीजेपी के लिए यहां दो तरह की चुनौतियां होंगी.पहली चुनौती ये कि मुस्लिम और दलित वोटर बीजेपी के खिलाफ लामबंद होकर वोट न करे और दूसरी चुनौती होगी इन दोनों के अलावा जो वोट बैंक है उसे अपने पक्ष में लामबंद करना.नगीना सुरक्षित सीट है और यहां तीनों प्रमुख दावेदार दलित ही हैं ऐसे में दलित वोटरों के बंटने की संभावना बनती है.दूसरी तरफ कांग्रेस के मजबूत उम्मीदवार ने भी यहां बीजेपी की मुश्किलें थोड़ी सी कम की हैं.अगर कांग्रेस का उम्मीदवार जरा भी मजबूत दिखा तो मुस्लिम वोटरों का बंटवारा भी हो सकता है.ऐसे में बीजेपी ये सीट बचा सकती है लेकिन अगर मुस्लिम और दलित मतदाताओं ने अपने स्वभाव के अनुरूप वोट दिया तो बीजेपी को इस सीट पर झटका भी लग सकता है