पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में जोरदार जीत दर्ज की. बीजेपी ने पहली बार 300 का आंकड़ा पार किया. बीजेपी को 300 से ज्यादा सीट हासिल हुईं. इसके अलावा 1971 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब पूर्ण बहुमत की सरकार ने सत्ता में वापसी की. कई बड़े राज्यों में बीजेपी ने विरोधियों का सफाया कर दिया. बिहार जैसे राज्य में एनडीए ने शानदार प्रदर्शन किया और 40 में से 39 सीटों पर जीत हासिल की. इन सबके बीच कई ऐसे मुद्दे रहे जिन्हें विपक्ष ने चुनाव में खूब उठाया. भले ही ये मुद्दे चुनाव में बीजेपी के खिलाफ कारगर अस्त्र न बन पाएं हों लेकिन नरेंद्र मोदी की आने वाली सरकार के सामने ये मुद्दे एक बार फिर से बड़ी चुनौती बनकर उभरने वाले हैं-

1.रोजगार- बीते लोकसभा चुनाव के वक्त पीएम मोदी ने सरकार बनने पर हर साल 2 करोड़ रोजगार देने का वादा किया था.उनका ये वादा चुनावी साल तक पूरा होता नहीं नजर आया.कई आंकड़े आए जिनमें कहा गया की नोटबंदी की वजह से रोजगार में कमी आई है.सरकारी नौकरियों में भी परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी से परीक्षाएं कराना मुश्किल हुआ ऐसे में युवाओं के सामने रोजगार का बड़ा संकट खड़ा हुआ.बीते दिनों राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय की एक रिपोर्ट सामने आई जिसमें दावा किया गया की रोजगार की हालत बीते 45 साल में भारत में सबसे खराब है.हालांकि नीति आयोग ने इन आंकड़ो का बाद में खंडन भी किया.राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के प्रमुख ने भी ये कहते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था की सरकार आंकड़ों को गंभीरता से नहीं ले रही और रोजगार और बेरोजगारी के आंकड़ों को जारी नहीं कर रही है.उनके इस्तीफे के बाद रोजगार के मुद्दे पर सरकार घिरी गई. भले ही मोदी सरकार चुनाव जीत गई हो लेकिन रोजगार की समस्या को नजरअंदाज करना उनके लिए आसान नहीं होगा. राहुल गांधी ने 2020 तक 22 लाख सरकारी नौकरी देने का वादा किया था. बगैर सरकारी प्रणाली की कमियां दूर किए ऐसा करना असंभव है. अब ये काम बीजेपी सरकार को करना होगा.

2.किसानों की समस्या- मोदी सरकार अपने शासनकाल में जिन मुद्दों पर सबसे ज्यादा घिरी रही उनमें किसानों की समस्याएं अहम हैं.उनके शासनकाल में कई बार किसान दिल्ली तक आंदोलन करते हुए आए.किसानों की समस्या देश में उनकी फसलों का सही मूल्य न मिलना है जिसकी वजह से किसानों की आय पर फर्क पड़ता है.इसके साथ ही किसान कर्ज के बोझ के तले भी दब जाते है.महाराष्ट्र के नासिक में एक किसान को 750 किलो प्याज के मिले महज 1064 रुपए मिले.नाराज किसान ने ये कमाई पीएम राहत कोष में भेज दी.चुनावी साल में अंतरिम बजट में मोदी सरकार ने किसानों के लिए साल में 6000 रुपए की मदद देने का एलान किया.ये धनराशि 3 किश्तों में किसानों तक पहुंचेगी.चुनावी साल में सरकार के इस एलान से किसान भले ही तुरंत खुश हो गए हों लेकिन इससे उनकी समस्याओं का निदान नहीं होता. जरूरी होगा कि किसानों के मुद्दे पर सरकार कुछ ठोस कदम उठाए. ये सुनिश्चित करे कि सभी किसानों को उनकी फसल का मूल्य सही मिले और उनकी समस्याएं दूर हों.

3. कश्मीर समस्या- कश्मीर का मुद्दा विपक्ष ने नहीं उठाया लेकिन बीजेपी के कोर वोटर के लिए ये मुद्दा अहम रहा है. कश्मीर में आतंकवाद से लेकर पंडितों की वापसी और शांति बड़ा मुद्दा है. भले ही यहां आतंकवाद पर काबू पाया गया हो लेकिन अलगाववाद की भावना बढ़ी है. इसे दूर करना बीजेपी सरकार के लिए चुनौती होगा. इतना बड़ा बहुमत लेने के बाद अनुच्छेद 370 को लेकर भी बीजेपी पर फैसला करने का दबाव होगा और कश्मीर में शांति बहाली हो ये फैसला लेना जरूरी है.