कोरोना वायरस के संक्रमण में पिछले कुछ दिनों में काफी तेजी देखी जा रही है। जंहा एक दिन में मरने वालों की संख्या 150 हो गयी वहीं एक दिन में संक्रमण के मामले भी 6000 को पार कर गए। ये आंकड़े तब है जब टेस्ट में तेजी जरूर आयी है पर अभी भी टेस्ट उतनी संख्या में नहीं हो पा रहे जितने होने चाहिए।

भारत में बिना लक्षण वाले मरीजों की संख्या ज्यादा बताई जा रही है ऐसे में बहुत से ऐसे लोग भी हो सकते है जिनके अंदर वायरस तो होगा पर लक्षण न होने की वजह से टेस्ट की कोई सम्भावना ही नहीं है। लॉकडाउन में ढील के बाद लोग बेपरवाह हो कर जिस तरह से बाहर घूम रहे है, दिल्ली में यातायात जाम की तस्वीरें सामने आने लगी है उसे देख कर लग रहा है की आने वाले दिनों में संक्रमण की रफ्तार और बढ़ने वाली है।

मई के महीने में जब तापमान 45 डिग्री को पार करेगा उसके बाद ये देखने वाली बात होगी की तापमान का संक्रमण की रफ़्तार पर कोई प्रभाव होता है या नहीं। सामाजिक दूरी और मास्क का इस्तेमाल ठीक उसी तरह से लोग कर रहे है जैसे चालान से बचने के लिए सस्ते प्लास्टिक वाले हेलमेट का करते थे। जबकि यंहा पर भी खतरा अपनी ही जान को है।

अभी तक जितने भी मामले सामने आये है उनमे कुछ हद तक लापरवाही के बाद भी ये कहा जा सकता है की मरीजों को ठीक ठाक इलाज और देखभाल मिली है। सरकारी हॉस्पिटल की लापरवाही और मरीजों के साथ बदसलूकी इनसे सभी आम भारतीय परिचित है। पर सोचिये यही संक्रमण की संख्या एक बार अगर 5 लाख को पार करती है तो इन्ही हॉस्पिटल पर कितना दवाब होगा और तब तक डॉक्टर और नर्स काम कर कर के थक चुके होंगे।

स्पेनिश फ्लू: 20वीं सदी की वो महामारी जिसने 5 करोड़ लोगों को मौत की नींद सुला दिया

हॉस्पिटल में बेड, डॉक्टर का आभाव ये सभी परेशानियां आने वाले समय में विकराल रूप ले सकती है। संक्रमण को जल्दी ठीक करने के लिए किसी दवा का न होना या फैलाव को रोकने के लिए किसी भी तरह की वैक्सीन की उपलब्धता जल्द आने वाले समय में दिखाई नहीं देती। किसी भी वैज्ञानिक तरीके से यह नहीं कहा जा सकता की आने वाले कुछ महीनों में वायरस पर काबू पा लिया जायेगा।

जबकि दुनिया भर में इस बीमारी से अब तक 3 लाख 20 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके है। हालांकि इस वायरस को स्पेनिश फ्लू जितना खतरनाक नहीं बताया जा रहा पर याद रखे स्पेनिश फ्लू से मारे जाने वाले 5 करोड़ लोग कुछ दिनों या महीनों में नहीं मारे गए थे। लगभग 2 साल से भी ज्यादा समय में इतनी मौते हुई थी।

अगर आने वाले समय में असरदार दवाई या वैक्सीन नहीं बन पाती है तो जिस रफ़्तार से इस संक्रमण से मौते हो रही है उसे देख कर ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी की हम एक बार फिर से स्पेनिश फ्लू का इतिहास दोहराने की तरफ बढ़ रहे है।