भारत में बीते 11 सालों में शिशु मृत्यु दर में 42 फीसदी की कमी आई है. सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत में अभी जन्म लेने वाले 1000 शिशुओं में से 33 की मौत हो जाती है. हालांकि ये ताजा आंकड़े 2017 तक के हैं. 2006 में जन्म लेने वाले शिशुओं में से 57 की मौत तुरंत हो जाती थी. शिशु मृत्यु दर में कमी के बावजूद भारत में शिशु मृत्यु दर दुनिया भर के औसत से कहीं ज्यादा है. भारत में शिशु मृत्यु दर अभी 29.4 फीसदी है. ये गरीब अफ्रीकी देशों सेनेगल के बराबर है. अगर पड़ोसियों में बात करें तो पाकिस्तान और म्यांमार ही इस मामले में भारत से पिछड़े हैं.

ये आंकड़े गृह मंत्रालय के जनगणना कमिश्ननर ने जारी किए हैं. शिशु मृत्यु दर के ये आंकड़े भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की खराब हालत को दिखाते हैं. भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में शिशु मृत्यु दर ज्यादा है. यहां हर 1000 शिशुओं में से 37 की मौत हो जाती है जबकि शहरी क्षेत्रों में ये आंकड़ा 23 का है. अगर राज्यों की बात करें तो मध्य प्रदेश इस मामले में सबसे ज्यादा पिछड़ा है. यहां शिशु मृत्य़ु दर 47 है. इसके बाद असम (44) और अरुणाचल प्रदेश (42) का नंबर आता है. मध्य प्रदेश की शिशु मृत्यु दर अफ्रीकी देश नाइजर के बराबर है जिसका 80 फीसदी हिस्सा सहारा के रेगिस्तान का है. संयुक्त राष्ट्र के मानव विकास सूचकांक में ये देश बेहद ही नीचे है.

इस मामले में अगर बेहतर करने वाले राज्यों की बात करें तो नागालैंड इनमें सबसे ऊपर है. यहां शिशु मृत्यु दर 7 है जो कुवैत और लेबनान के बराबर है. नागालैंड के बाद गोवा(9) और केरल (10) का नंबर आता है. इनके बाद पुडुचेरी (11) सिक्किम (12) और मणिपुर (12) जैसे राज्यों का नंबर आता है जिनकी आबादी 10 लाख से कम है.

अगर ऐसे राज्यों की बात करें जिनकी आबादी भी ज्यादा है उन्होंने शिशु मृत्यु दर में सुधार किया है तो दिल्ली और तमिलनाडु का नाम सामने आता है. इन दोनों राज्यों में 2006 से 2011 के बीच शिशु मृत्यु दर 57 फीसदी की कमी आई है. इनके बाद जम्मू कश्मीर (56 फीसदी), हिमाचल प्रदेश (56 फीसदी) और पंजाब (52 फीसदी) का नाम सामने आता है.