दिल्ली और हरियाणा सीमा पर चल रहा प्रदर्शन आज 17 वें दिन भी जारी है। कृषि सुधार बिलों के खिलाफ चल रहा प्रदर्शन जल्द ख़त्म होते नहीं दिख रहा। सरकार के साथ कई दौर की वार्ता होने के बाद भी उसका कोई नतीजा नहीं निकल पाया। सरकार की तरफ से बताया जा रहा है की बातचीत के दौरान आने वाले संगठन के नेताओं को कृषि बिल से जुड़े प्रावधानों के बारे में कोई ज्ञान नहीं है। वह सिर्फ बिल को वापस लेने की बात करते है।

सरकार के रुख से ये साफ़ होता नजर आ रहा है की बिल से जुड़े प्रावधानों में सुधार किया जा सकता है पर बिल वापस नहीं होगा। कुछ मंत्रियो का रुख साफ़ है की सरकार 5 प्रतिशत लोगों के विरोध की वजह से 95 प्रतिशत किसानों का नुकसान नहीं होने देगी।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का कहना है की आंदोलन अब माओवादियों और कट्टर वामपंथी लोगों के हाथ जा चुका है। सरकार के दरवाजे किसानों से बात के लिए हमेशा खुले है। पीयूष गोयल का कहना है की किसान इन माओवादियों के बहकावे में न आये।

कल प्रदर्शन के दौरान दिल्ली दंगे और भीमा कोरे गांव दंगे से जुड़े लोगों के पोस्टर लहराकर उन्हें जेल से छोड़ने की मांग की गयी थी। ऐसे में सवाल उठना लाज़मी है की ये कैसा किसानों का प्रदर्शन है जिसमे देश विरोधी ताकतों के समर्थन में नारेबाजी हो रही है। कभी दंगाई को छोड़ने की मांग तो कभी खालिस्तान के समर्थन में नारेबाजी ये यही बताता है की ये प्रदर्शन सिर्फ और सिर्फ किसानों का प्रदर्शन नहीं है।

किसान और कृषि बिल की आड़ लेकर शाहीन बाग़ जैसा ही तरीका अपनाया जा रहा है। लम्बे समय तक रास्ता जाम कर आम आदमी को दिक्कत करो, खाने पीना का भंडारा चला कर भीड़ जमा करो और पूरी दुनिया को इस तरह से दिखाओ की सरकार किसान विरोधी है।

प्रदर्शन में शामिल लोगों की बैक ग्राउंड की जाँच ख़ुफ़िया विभाग द्वारा की जा रही है। किसानों के बीच प्रदर्शन कर रहा दर्शनपाल पीडीएफआइ का सदस्य है, जिसकी स्थापना 2006 में वरवर राव व अन्य ने की थी। अब इसी आंदोलन में वरवर राव की रिहाई की मांग की जा रही है।