बीते दिनों दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक वीडियो ट्विटर पर रीट्वीट किया.ये वीडियो दावोस में हुए वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम की एक जोरदार बहस का था.बहस में याहू के पूर्व सीएफओ केन गोल्डमैन बताते हैं की किस तरह से अमेरिका में बेरोजगारी की दर इस समय सबसे कम है.उन्होंने युवाओं और अश्वेत समुदाय में सबसे कम बेरोजगारी दर होने का दावा किया.उनके इस तथ्य का जवाब ऑक्सफैम इंटरनेशनल की कार्यकारी निदेशक विनी ब्यानिमा ने दिया.

उन्होंने रोजगार की गुणवत्ता के बारे में जानकारी दी.ब्यानिमा ने अमेरिका की ही पोल्ट्री फॉर्म में काम करने वाली महिलाओं का उदाहरण दिया.उन्होंने बताया की फॉर्म में चिकन काटने और पैक करने वाली ये महिलाएं डाइपर पहनकर काम करती हैं.इसका कारण है की इन लोगों को वॉशरुम जाने तक का ब्रेक नहीं दिया जाता.उन्होंने कहा की नौकरियों के साथ उनकी गुणवत्ता भी जरूरी है.आखिर इस तरह की नौकरियों में सम्मान कहां है?

हमारे भारत में भी रोजगार के नाम पर सीवर में घुसकर अपनी जान गंवाते मजदूर हों या 8 घंटे की नौकरी के साथ जरूरी 4 घंटे का ओवरटाइम करने वाले सुरक्षा गॉर्ड.यहां तक की हमारे यहां पुलिसकर्मियों तक को छुट्टियों से लेकर लंबी शिफ्ट में काम करने को मजबूर होना पड़ता है.इन सबके बीच सवाल जरूरी है की जरूरत रोजगार की है या उस तरीके के रोजगार की जो अमेरिका की पोल्ट्री फॉर्म में महिलाएं कर रही हैं.

भारत में आज से 10-12 साल पहले कॉल सेंटर का बिजनेस आया.तमाम लोगों को रोजगार मिला.उस वक्त इनमें मिलने वाली तनख्वाहें का स्तर ठीक था.लेकिन वक्त गुजरता गया लेकिन इनमें तनख्वाहें वैसी की वैसी ही रहीं.एक तरफ 10-12 साल में महंगाई तो बढ़ी लेकिन इन्होंने अपना स्तर नहीं सुधारा.आज भी यहां लोग 10-12 हजार रूपयों में नौकरी करते मिल जाएंगे.महंगे शहरों में बने इन कॉल सेंटर में काम करने वाले कर्मचारी अगर बीमार पड़ जाएं तो इलाज के लिए भी शायद साथी से उधार लेना पड़े.

भारत में बेरोजगारी पर सरकार और विपक्ष के बीच रोज तकरार होती है.नए नए आंकड़े सामने आते हैं.अपने अपने पक्ष में सभी आंकड़े देते हैं.हमारे यहां तो अभी रोजगार की गुणवत्ता की बात दूर दूर तक है ही नहीं.बेहतर हो की जब रोजगार पर रोज लड़ाई हो ही रही है तो इसकी गुणवत्ता के बारे में भी बहस की जाए.ये सुनिश्चित किया जाए की न्यू इंडिया में कम से कम नौकरी पाने वालों को अमेरिका की पोल्ट्री फॉर्म में काम करने वाली महिलाओं की तरह का रोजगार न मिले.