आधार कार्ड के लिए इकठ्ठा किए जाने वाले बायोमेट्रिक डाटा का आधार बनाने और पहचान में प्रयोग करने के अतिरिक्त कोई इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.दरअसल ये खबर आ रही थी की किसी अपराध की जांच के लिए बायोमेट्रिक डाटा का इस्तेमाल किया जा सकता है.इन खबरों का खंडन करते हुए आधार नियामक संस्था UIDAI ने यह सफाई दी है.

हालांकि UIDAI ने अपनी सफाई में ये भी साफ किया धारा-33 के अंतर्गत राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा होने जैसी विशेष परिस्थिति में कैबिनेट सचिव के नेतृत्व वाली कमेटी की अनुमति के बाद सुरक्षा एजेंसिया जांच के लिए बायोमीट्रिक डाटा का इस्तेमाल कर सकती हैं.

UIADAI ने बयान जारी करते हुए कहा, "सुप्रीम कोर्ट में जारी सुनवाई के दौरान भी भारत सरकार लगातार यही पक्ष रख रही है.UIADI ने कभी किसी सुरक्षा एजेंसी के साथ कोई डाटा शेयर नहीं किया.यहां यह बताना भी जरूरी है कि जब मुंबई हाईकोर्ट ने एक केस में UIDAI को सुरक्षा एजेंसी के साथ डाटा शेयर करने को कहा तो यहा केस सुप्रीम कोर्ट तक आया और सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक भी लगा दी थी."

दरअसल नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के प्रमुख ईश कुमार ने कहा था कि आधार डाटा तक सीमित पहुंच पुलिस की भी होनी चाहिेए ताकि पहली बार क्राइम करने वाले और लावारिश शवों की पहचान हो सके