ज़की-उर-रहमान लखवी, 2008 में हुए मुंबई में आतंकी हमले के मुख्य आरोपी, कल पाकिस्तान की एक अदालत ने लखवी को आतंकी गतिवधियों को आर्थिक मदद देने के आरोप में 15 साल की कैद की सजा सुनाई है। अमेरिका ने पाकिस्तान के इस कदम का स्वागत किया है। हलाकि भारत सरकार का मानना है की पाकिस्तान ने फाइनेंसियल एक्शन टास्क फाॅर्स के कड़े आर्थिक प्रतिबंधों से बचने के लिए ये कार्रवाही सिर्फ एक दिखावे के लिए की है।

अमेरिका ने भी पाकिस्तानी अदालत के कदम की सराहना जरूर की है पर साथ ही पाकिस्तान से कहा है की लखवी को मुंबई आतंकी हमले में भी सजा मिलनी चाहिए। अमेरिका के अनुसार "लखवी के कारनामे आतंक को आर्थिक मदद से भी बहुत बड़े है और उसे उसकी सजा मिलनी चाहिए। जब तक उसे मुंबई आतंकी हमले में दोषी करार दे कर सजा नहीं दी जाती तब तक ये दिखावा मात्र ही लगेगा"।

पाकिस्तान पहले से ही फाइनेंसियल एक्शन टास्क फाॅर्स की ग्रे लिस्ट में है और ब्लैक लिस्ट में आने से बचने के लिए दिखावे के तौर पर दवाब में कई आतंकियों के खिलाफ कार्रवाही कर रहा है। लगातार ख़राब होती अर्थव्यवस्था और अंदरूनी कलह से पहले से जूझ रहे पाकिस्तान पर आतंकियों पर कार्रवाही के लिए विश्व के कई बड़े देशों का दवाब है।