राज्यसभा सभापति वैंकया नायडू ने मानसून सत्र की शुरुआत एक नए रिकॉर्ड के साथ की। जब उन्होंने ये घोषणा की उच्च सदन में अब २२ भारतीय भाषाओ में अनुवाद की सुविधा उपलब्ध है तो इस घोषणा को करने में उन्होंने 10 भाषाओ का प्रयोग किया।
इससे पहले अब तक 17 भारतीय भाषाओ जिनमे असामी, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, मलयालम, तमिल, तेलुगु, पंजाबी, उर्दू आदि का त्वरित अनुवाद की व्यवस्था थी।

अब इनमे डोगरी, कश्मीरी, कोंकणी, संथाली और सिंधी को भी शामिल कर लिया गया है।
नायडू जब ये घोषणा कर रहे थे तब उन्होंने बांग्ला, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मराठी, नेपाली, ओरिया, पंजाबी, तमिल, तेलुगु के शब्दों का प्रयोग किया।

राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी अनुवाद की सुविधा का स्वागत करते हुए कहा की संस्कृत को भी भविष्य में शामिल किया जाये।