आप यूपी की दो तस्वीरें देखिए, एक तस्वीर में शामली के एसपी साहब अजय कुमार दुबे एक कांवड़िये को फुट मसाज देते नजर आ रहे हैं. दूसरी तस्वीर में भी देखिए जिसमें उन्नाव गैंगरेप कांड की पीड़िता जिंदगी के लिए संघर्ष कर रही है और उसी यूपी पुलिस के अधिकारी लगातार हादसे बताने पर जोर दे रहे हैं. हालांकि डीजीपी ने सीबीआई जांच कराने के लिए तैयार होने की बात कही है लेकिन फिर भी पुलिस अधिकारी लगातार ये कह रहे हैं कि रायबरेली में जो हुआ वो हादसा है.

ये दोनों तस्वीरों से हमें पता चल सकता है कि यूपी की कानून व्यवस्था और हालात में बदलाव क्यों नहीं हो रहा. पुलिस अधिकारी कांवड़िये को फुट मसाज देने को कर्तव्य बता रहे हैं और जांच वाले मामले को हल्का करने की कोशिश कर रहे हैं. ये दिखाता है कि यूपी की पुलिस संविधान नहीं बल्कि सत्ता में विश्वास करती है. अक्सर फिल्में देखकर आप कहते हैं कि ये सच नहीं हो सकता लेकिन उन्नाव गैंगरेप कांड शुरूआत से लेकर अब तक बॉलीवुड की किसी टिपिकल फिल्म की तरह चल रहा है.

एक लड़की सत्ताधारी पार्टी के विधायक पर रेप का आरोप लगाती है. उसकी सुनवाई नहीं होती. वो सीएम आवास के सामने आत्मदाह का प्रयास करती है. खबर थोड़ा उठती है लेकिन फिर भी न तो विधायक गिरफ्तार होते हैं और एफआईआर होती है. खास बात ये है कि न्यूज चैनल में ब्रेकिंग न्यूज़ पर चलकर अब तक ये खबर खत्म हो गई होती है. फिर एक दिन पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत हो जाती है. उसके बाद मीडिया हरकत में आ पाता है. पता चलता है कि पुलिस हिरासत में ही विधायक कुलदीप सेंगर के भाई ने पीड़िता के पिता की हत्या कर दी है. इसके बाद सरकार पर दबाव बनता है. कई दिनों तक घिरने के बाद आखिरकार कुलदीप सेंगर को मजबूरन गिरफ्तार किया जाता है. हालांकि बीजेपी ने उन्हें पार्टी से नहीं निकाला. सेंगर की गिरफ्तारी के साथ मामला थोड़ा ठंडा पड़ जाता है.

वक्त गुजरता है और लोकसभा चुनाव आ जाते हैं. उन्नाव से साक्षी महाराज बीजेपी से चुनाव लड़ते हैं और वो जीत जाते हैं. जीतने के कुछ दिनों बाद ही वो जेल जाकर कुलदीप सेंगर को चुनाव में मदद के लिए शुक्रिया अदा करते हैं और 28 जुलाई को उन्नाव गैंगरेप कांड की पीड़िता को एक ट्रक टक्कर मार देता है जिसमें पीड़िता के कई रिश्तेदारों की मौत हो जाती है और वो बुरी तरह से घायल हो जाती है. मीडिया में ये खबर फिर से आती है और सरकार पर फिर दबाव बनता है. अभी तक योगी जी घटना पर कुछ नहीं बोले हैं पर यूपी पुलिस के मुखिया जरूर बोले हैं. उनका कहना है कि पहली नजर में ये हादसा लग रहा है लेकिन हम जांच के लिए तैयार हैं. इस बीच एक खास सूचना ये है कि कुलदीप सेंगर अभी भी बीजेपी में हैं और वो निष्कासित नहीं हुए हैं.

जब योगी जी ने सत्ता संभाली थी तो कहा गया था कि योगी जी मठाधीश हैं. संत समाज से हैं. वो कभी किसी के साथ गलत नहीं होने देंगे लेकिन उन्नाव गैंगरेप कांड का अब तक का हाल देखकर लगता है कि योगी जी ही नहीं बल्कि मोदी जी ने भी सेंगर के पापों के सामने आंखे मूंद ली है. ये बेहद बड़ा सवाल है कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली बीजेपी कि आखिर क्या मजबूरी है जो कुलदीप सेंगर अभी तक पार्टी में हैं.

यूपी में रोज एनकाउंटर की खबरें सामने आती हैं. योगी जी भी कानून व्यवस्था के नाम पर रोज आंकड़े गिनवाते हैं लेकिन क्या यूपी की हालत वाकई सुधरी है. बीती 17 जुलाई को यूपी दो बड़ी आपाराधिक वारदातों से दहल गया. एक तरफ जहां भूमि विवाद में सोनभद्र में 11 लोगों की हत्या हो गई वहीं संभल में कानून के रक्षक ही अपराधियों की गोलियों का शिकार बन गए. कानून व्यवस्था यूपी में बड़ा मुद्दा रहा है. मुलायम सिंह यादव खुद इस मुद्दे पर चुनाव हारे हैं तो मायावती इसी की बदौलत सत्ता में वापस भी लौटी हैं लेकिन योगी जी की मंशा क्या है ?

वो यूपी में निवेश लाने की बात करते हैं लेकिन अगर अपराध इसी तरह हावी रहा तो भला कैसे निवेश आएगा और कैसे यूपी का विकास होगा ? योगी जी चाहें जो कुछ भी दावे करें लेकिन जमीन पर दिखाई पड़ता है कि उनसे हालात नहीं संभल रहे. हालात संभलने की बात छोड़िए कुलदीप सेंगर जैसे मामलों में सत्ता का पक्षपाती रवैया भी साफ नजर आ रहा है. ऐसे में हालात सुधरें भी तो भला कैसे ? इस सवाल का जवाब कौन देगा ? योगी सरकार की हालत तो देखकर लगता नहीं कि वो जनता के प्रति जवाबदेह हैं.