एक महिला जिसके सशक्त होने पर किसी को शक नहीं, शब्द कठोर लेकिन अंदाज संयमित, बेहतरीन वक्ता, पार्टी और देश के लिए हमेशा समर्पित और जिन्होंने विदेश मंत्री होने के अलग ही मायने तय कर दिए, वो सुषमा स्वराज अब हमारे बीच नहीं रहीं. बेशक उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था लेकिन वो इतनी जल्दी चली जाएंगी इसका अंदाजा किसी को भी नहीं था. 2002 में 7 साल की उम्र से मैंने राजनीति को देखना शुरू किया और जिन लोगों से भारतीय राजनीति की पहचान की उनमें सुषमा स्वराज एक थीं. वाजपेयी सरकार के उस दौर में सुषमा स्वराज से वरिष्ठ कई नेता थे लेकिन उनमें भी सुषमा स्वराज की अलग पहचान थी. 2004 में बीजेपी सत्ता से बाहर हो गई और उसे विपक्ष में बैठना पड़ा. बीजेपी का सत्ता से ये वनवास 2014 तक यानि 10 साल तक खिंचा. इन 10 सालों में सुषमा स्वराज जैसे नेताओं ने सत्ता पक्ष को खूब आईना दिखाया. संसद के बाहर और अंदर खूब संघर्ष किया और कभी लोगों ने ये नहीं कहा कि देश में विपक्ष की कमी महसूस हो रही है.

2009 से 2014 के बीच नेता प्रतिपक्ष के तौर पर सुषमा स्वराज ने संसद में खूब हमले किए. कांग्रेस के भ्रष्टाचार, विदेश नीति और तमाम नीतियों का जमकर विरोध किया लेकिन कभी भाषा की मर्यादा को पार नहीं किया. कभी किसी को ये नहीं कहना पड़ा कि सुषमा स्वराज ने पीएम के लिए आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया है. उनके निधन के बाद उनकी कई तस्वीरें और भाषण के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. आप उन्हें देखिए आपको सुषमा के व्यक्तित्व की एक एक झलक देखने को मिल जाएगी.

उनकी एक तस्वीर वायरल हो रही है. 2018 में शंघाई कारपोरेशन ऑर्गनाइजेशन की बैठक के बाद की इस तस्वीर में दुनिया के 11 देशों के विदेश मंत्री खड़े हैं. सभी पुरुष हैं और उनके बीच में अकेली महिला के तौर पर सुषमा स्वराज भारत का प्रतिनिधित्व कर रहीं थीं. उनके अंदर वो भारतीय आदर्श नारी नजर आई जो साड़ी पहनती है लेकिन उसकी आवाज भी बुलंद है. लोकसभा में बहस का भी एक वीडियो खासा वायरल होता है. इस वीडियो में वो कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा को पाठ पढ़ाते दिखाई देती हैं.

जब दीपेंद्र हुड्डा 12 इंच का आलू उगाने की बात करते हैं तो सुषमा स्वराज कहती हैं कि आप आलू उगाने की बात कर रहे हैं या लौकी. इस बातचीत के दौरान सुषमा ने अपने से उम्र में काफी छोटे दीपेंद्र हुड्डा के लिए बेटा शब्द का प्रयोग किया. उनका तर्क ऐसा था की दीपेंद्र हुड्डा जवाब में कुछ नहीं कह पाए लेकिन लहजा ऐसा था कि बजाय गुस्सा होने के वो खुद भी मुस्कुरा उठे.

1999 में बीजेपी ने उन्हें बेल्लारी से चुनाव लड़ाने का फैसला किया. वो चुनाव सोनिया गांधी के खिलाफ था यानि चुनाव जीतना काफी मुश्किल लेकिन सुषमा स्वराज पार्टी के लिए चुनाव लड़ने का फैसला किया. जबरदस्त चुनाव प्रचार किया और भले ही चुनाव न जीत पाईं हों लेकिन सोनिया गांधी के लिए इसे आसान भी नहीं होने दिया. विदेश मंत्री के तौर उनका कार्यकाल एक मिसाल बन चुका है. उन्होंने एक बयान दिया था कि भले ही आप मंगल ग्रह पर फंस जाएं लेकिन भारतीय दूतावास आपकी मदद के लिए पहुंचेगा. दरअसल ये बयान ही उनके काम को दिखाता है. विदेशों में फंसे तमाम भारतीयों को एक ट्वीट पर उन्होंने निकाला है. सऊदी अरब, कुवैत और दुनिया के जिस कोने से किसी भारतीय ने मदद की गुहार लगाई, उसकी सुनी गई. आज वो तमाम लोग चाहें वो किसी भी धर्म को मानने वालें हों वो दुखी हैं.

सुषमा स्वराज को उनकी राजनीति और विदेश मंत्री तौर पर किए गए उनके कामों के लिए हमेशा याद किया जाएगा. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे.