अभिनेता सोनू सूद इन दिनों सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं. दरअसल वो खुद के पैसे से बसों के जरिए प्रवासी मजदूरों को घर भिजवाने का काम कर रहे हैं. तमाम लोग सोशल मीडिया पर उनसे मदद की गुहार लगा रहे हैं और वो ट्विटर पर लोगों को जवाब भी दे रहे हैं. ऐसे में सोनू सूद को सभी की तारीफ मिल रही है. जनता और बाकी जगत के लोगों से तारीफ होती है, तो समझ में आता है लेकिन जब सत्ताधारी या बाकी राजनीतिक दल तारीफ करने लगें तो बेशर्मी ही नज़र आती है.

लॉकडाउन के बाद का वक्त देख लें, तो एक बात तो साफ है कि सरकारें प्रवासी मजदूरों से जुड़ीं हर एक समस्या से निपटने में नाकाम रही हैं. चाहें मजदूरों को शहरों में भोजन और आवास देना हो या पैदल घर के लिए निकल पड़ने पर वाहन की व्यवस्था हो. मजदूरों को सरकार से मदद की बजाय या तो पुलिस के डंडे मिले हैं या मौत. एक तरफ मजदूरों की दशा खराब थी तो दूसरी तरफ आलोचना भी हो रही थी. केंद्र सरकार खास तौर पर निशाने पर रही. साफ कहा गया कि विधायकों को बसों और जहाजों में रिसॉर्ट ले जाया जा सकता है लेकिन मजदूरों के लिए व्यवस्था नहीं की जा रही. जब सरकार ने ट्रेन चलाई, तो उसमें भी मजदूरों से पैसे ले लिए. तमाम आलोचनाओं के बीच अगर कोई सरकार ऐसे कदम उठाती है, तो वो या तो बेहद ही बेशर्म हो सकती है या बहुत ही कमजोर. फिलहाल केंद्र सरकार कमजोर तो नजर नहीं आती.

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बीते दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ने अपने पिता को साइकिल पर गांव ले जाने वाली ज्योति कुमारी की तारीफ की. इवांका के तारीफ करते ही मीडिया और कई नेता उत्साहित हो गए और गर्व का अनुभव करने लगे. केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने खेल मंत्री किरन रिजिजू से ज्योति कुमारी को साइक्लिंग का प्रशिक्षण देने की मांग की. पासवान के शब्द कुछ ऐसे थे, "मैं केन्द्रीय खेल मंत्री @KirenRijiju जी से भी आग्रह करता हूं कि पूरी दुनिया में साहस की मिसाल कायम करने वाली देश की बेटी ज्योति पासवान की साइकलिंग की प्रतिभा को और अधिक संवारने के लिए इसके उचित प्रशिक्षण और छात्रवृति की व्यवस्था करें. "

खेल मंत्री किरन रिजिजू ने भी इसका जवाब दिया, "मैं विश्वास दिलाता हूं कि SAI अधिकारियों और साइक्लिंग फेडरेशन्स से ज्योति कुमारी के परीक्षण के बाद मुझे रिपोर्ट करने के लिए कहूंगा। यदि संभावित पाया, तो उसे नई दिल्ली में IGI स्टेडियम परिसर में राष्ट्रीय साइक्लिंग अकादमी में प्रशिक्षु के रूप में चुना जाएगा."

मंत्री महोदयों को लगता है कि ज्योति कुमारी के 1200 किलोमीटर का सफर साइकिल से करने से देश की बड़ी तारीफ हुई है. ऐसा लग हा है कि मानो ज्योति कुमारी को पिता को साइकिल पर बैठाकर 1200 किलोमीटर का सफर तय करने का शौक था. सच को नकार देना तो सरकारों की आदत होती है लेकिन झूठ को सच मानकर उत्सव में बदल देने को क्या कहा जाना चाहिए. भारतेंदु हरिशचंद्र के एक नाटक का शीर्षक आता है 'भारत दुर्दशा'. अगर वाकई मंत्रियों को शर्म होती, तो बजाय वो इस तरीके के ट्वीट करने के, उन तमाम प्रवासी मजदूरों के लिए तुरंत कदम उठाते जो आज भी शहरों में मुसीबतों का सामना कर रहे हैं. प्रधानमंत्री ने आपदा को अवसर में बदलने का आवाहन किया था, उनके वज़ीरों ने आपदा को उत्सव में ही बदल दिया. कोई शर्म को इन मंत्रियों के घर का पता दे ताकि मंत्री जी थोड़ा कायदे से रहना सीख जाएं.

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केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने सोनू सूद की तारीफ की है. उनके ट्वीट पर ही गोरखपुर से बीजेपी सांसद रवि सांसद ने भी सोनू सूद की तारीफ की है. ये वो लोग हैं जिनके ऊपर मजदूरों को घर पहुंचाने की जिम्मेदारी है. जब इनकी शासन व्यवस्था फेल है, तभी सोनू सूद जैसे लोगों को सामने आना पड़ रहा है. गोरखपुर के सांसद महोदय से पूछा जाए कि कितने लोग उनके क्षेत्र में मुंबई या दिल्ली से आए. बाहर से आए लोगों किस साधन से आए. सांसद जी के पास शायद ही कोई आंकड़ा मिले. पीएम मोदी ने लोगों से आर्थिक मदद के लिए पीएम केयर्स में दान देने की मांग की थी. लोगों ने उसमें दान भी दिया लेकिन क्या आर्थिक मदद के अलावा अब सरकारी मशीनरी भी वाला काम भी आम लोग करेंगे ? अगर ऐसा है तो फिर सरकारों की ज़रूरत ही क्या है ?

दिल्ली में कोरोना का टेस्ट करवाने वाला एक शख्स बताता है कि वहां डॉक्टर और प्रशासन सुन नहीं रहे. तमाम लोगों की अलग अलग जगहों से यही शिकायतें हैं. कोरोना के काल ने भारत के फेडरल सिस्टम की बिल्कुल पोल खोल दी है. आजादी के 70 से ज्यादा साल के बाद भी हमारा फेडरल सिस्टम भगवान भरोसे नजर आता है. ऐसा महसूस हो रहा था कि कम से कम आपदा के वक्त तो भारत का फेडरल सिस्टम एक इच्छाशक्ति का परिचय देगा लेकिन पिछले 2 महीने के हालात देखकर नजर आता है कि हम कभी नहीं सुधरने वाले. फिलहाल कोरोना का प्रकोप बढ़ता जा रहा है और सरकारी तंत्र ढहता हुआ नजर आ रहा है. देश के बड़े शहरों में मजदूर अभी भी फंसे हैं. इनकी हालत वो है कि काम करने जाएं तो कोरोना का डर, वर्ना भूख का डर. फिलहाल तो हालत देखकर मजदूरों से कहना चाहिए, " देश के मजदूरों ट्विटर पर आ जाओ और सोनू सूद से मदद मांग लो, सरकार से ना हो पाएगा."