अपने 4 साल से ज्यादा के कार्यकाल में शायद मोदी सरकार पहली बार इतनी समस्याओं से घिरी हुई है. खास बात ये है कि
चुनाव को अब एक साल से भी कम का वक्त बचा हुआ है लोगों में मोदी सरकार का वो जादू नहीं नजर आ रहा जो 2014
में चुनाव के वक्त था.आइए आपको बतातें हैं की वो कौन से मुद्दे हैं जिन पर मोदी सरकार इस समय घिरी हुई है.

1.पेट्रोल-डीजल के दाम - पेट्रोल के दाम जिस तरह से रोज ऊंचाई पर चढ़ रहे हैं उसे देखते हुए ये अनुमान लगाया जा रहा है
कि दिसंबर तक ये 100 के पार हो जाएंगे.लगातार बढ़त के बाद कल जरूर कुछ दाम कम हुए लेकिन फिर जब तक इन
दामों में स्थिरता नहीं आएगी तब तक सरकार को इसके लिए घिरी रहेगी.डीजल के दामों पर सरकार की ओर से कई बार
कहा जाता है की ये तो अमीर लोग इस्तेमाल करते हैं इसमें क्या दिक्कत लेकिन एक कृषि प्रधान देश में सरकार को सोचना
चाहिए की सिंचाई के लिए पंपिंग सेट भी डीजल से ही चलते हैं.माना जा रहा है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार की हालत के कारण
ऐसा हो रहा है लेकिन जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत कम थी तब भी सरकार ने अपना खजाना भरने के लिए
दाम काबू में नहीं किए इसलिए पेट्रोल-डीजल का मुद्दा न केवल अभी बल्कि लंबे समय में भी सरकार के लिए चुनौती
साबित होने वाला है.

2.गिरता रुपया और सरकार की साख- विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का एक पिछली सरकार के वक्त संसद में दिया हुआ एक
बयान खासा वायरल हो रहा है.बयान में वो कहती हैं की रुपया देश की करेंसी ही नहीं सम्मान भी है और इसका गिरना देश
के सम्मान में भी गिरावट है.कल डॉलर के मुकाबले रुपया सबसे कमजोर स्तर 70.10 पैसे पर पहुंच गया.जानकारों का
मानना है कि ये दरअसल रुपया गिर नहीं रहा बल्कि डॉलर मजबूत हो रहा है.अमेरिकी नीतियों के कारण ऐसा हो रहा
है.सरकार रुपये को लेकर घिरी हुई है और फिलहाल इसमें कोई सुधार नहीं दिखता.ऐसे में चुनाव के ठीक वक्त पहले ऐसा
होना सरकार की चिंताए बढ़ा रहा है और साख पर सवाल खड़े कर रहा है.

3.नोटबंदी का असफल होना- रिजर्व के द्वारा जारी हालिया आंकड़ों के बाद से सरकार नोटबंदी को लेकर घिरी हुई
है.नोटबंदी के एलान के वक्त पीएम का कहना था की इसका प्रमुख लक्ष्य देश की अर्थव्यवस्था में घूम रहे काले धन को
खत्म करना है और करीब 99 फीसदी पुराने नोटों की वापसी के बाद ये साफ है की नोटबंदी अपने उद्देश्य में असफल रही
और सरकार इसे लेकर विपक्ष और आलोचकों के निशाने पर है.2019 के चुनावों तक नोटबंदी का ये मुद्दा सरकार के लिए
एक बड़ी समस्या साबित होने वाला है.

4.सवर्ण वोटरों की नाराजगी- आप हर चीज पर नजर दौड़ा लें लेकिन चुनाव में भला जाति को नजरंदाज कैसे कर सकते हैं.
एससी-एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के बाद से लगातार खबरें आ रही हैं की सवर्ण वोटर सरकार से
नाराज है.चूंकि ये वर्ग बीजेपी का कोर वोटर रहा है ऐसे में सरकार के सामने ये एक बड़ी समस्या होने वाली है.सरकार ने
जिस तरह से प्रमोशन में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में अपना रुख सामने रखा है उसके बाद भी सवर्ण नाराज हैं.सोशल
मीडिया पर लगातार सवर्ण जाति के लोग नोटा को विकल्प बनाने की बात कर रहे हैं. अगर सरकार चुनाव से पहले इस वर्ग
की नाराजगी को दूर करने से नाकाम रही तो वाकई 2019 सरकार के लिए मुश्किल होने वाला है.

5.बेरोजगारी की समस्या- पीएम मोदी ने 2014 के चुनाव से पहले हर साल 2 करोड़ रोजगार देने का वायदा किया था
लेकिन हालत साफ है कि सरकार इसमे नाकाम रही है.रोजगार के मोर्चे पर साफ है कि युवाओं को मोदी सरकार से जो
उम्मीद थी वो पूरी नहीं हुई है हालांकि सरकार EPFO के आंकड़ों के जरिए जरूर पिछले साल 1 करोड़ से ज्यादा
रोजगार देने की बात कर रही है लेकिन रोजगार की हालत वाकई चिंताजनक है.अगर विपक्ष वाकई इस मुद्दे को देश के
युवाओं के सामने ठीक से रखने में कामयाब रहा तो वाकई सरकार के लिए ये भी एक बड़ी चुनौती साबित होने वाली है.