केंद्र की मोदी सरकार ने गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है.केंद्र सरकार को इसके लिए संविधान संशोधन करना होगा.दूसरी तरफ संसद में शीतकालीन सत्र का आज आखिरी दिन है.ऐसे में केंद्र सरकार सिर्फ इसे संसद के पटल पर रख पाएगी.दूसरी तरफ खबरें ऐसी भी आ रही हैं की सरकार बिल को पास कराने के लिए शीतकालीन सत्र का समय बढ़ा भी सकती है.

अगर ये बिल संसद में पास हो जाता है तो सवर्ण वर्ग से इसका फायदा ब्राह्मण, ठाकुर, भूमिहार, कायस्थ, बनिया, जाट और गुर्जर को मिलेगा. हालांकि आठ लाख सालाना आय और पांच हेक्टेयर तक ज़मीन वाले गरीब ही इसके दायरे में आएंगे.रहने का मकान 1000 स्क्वायर फीट से कम में हो और अगर ये शहरी क्षेत्र के बाहर हो तो ये 200 यार्ड से कम में होना चाहिए. इन सभी वर्गों को 10 फीसदी आरक्षण के लिए संविधान के 15 और 16 अनुच्छेदों में संशोधन करना होगा क्योंकि संविधान में अभी अधिकतम 50 फीसदी आरक्षण का ही प्रावधान है.

संविधान संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में बिल का दो तिहाई बहुमत के साथ पास होना जरूरी है.और खास बात ये है की दोनों सदनों में ही सरकार के पास दो तिहाई बहुमत नहीं है.लोकसभा में जहां सरकार को विपक्ष के 46 सांसदों की जरूरत होगी वहीं राज्यसभा में 76 अतिरिक्त सांसदों का साथ पाकर ही सरकार संविधान संशोधन में सफल हो पाएगी.जिसके बाद सरकार को 14 राज्यों की विधानसभाओं से बिल के लिए मंजूरी लेनी होगी और आखिर में ये बिल राष्ट्रपति की टेबल पर पहुंचेगा.

चूंकि बात विपक्षी पार्टियों के समर्थन की आ रही है तो लोकसभा चुनाव का वक्त नजदीक है.ऐसे में कोई भी पार्टी सवर्णों की नाराजगी मोल लेना नहीं चाहेगी.कांग्रेस की इस फैसले पर प्रतिक्रिया के बारे में बात करें तो उन्होंने सीधे तौर पर बिल के समर्थन या विरोध के बारे में बात नहीं की है.उन्होंने रोजगार देने में आरक्षण का विरोध न करने की बात कही है.हालांकि उन्होंने सरकार पर रोजगार न देने पर भी सवाल पूछा है.अरविंद केजरीवाल ने भी बिल को समर्थन देने की बात कही है.सरकार के सहयोगियों में एलजेपी के चिराग पासवान ने फैसले का समर्थन किया है.

फिलहाल विपक्ष के लिए सरकार ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं.अगर वो बिल का विरोध करते हैं उनके सवर्ण उनके खिलाफ लामंबद हो सकते हैं.अगर विरोध नहीं करेंगे तो कहीं न कहीं अन्य जातियों का वोट खोने का डर उन्हें रहेगा.कहीं न कहीं अब चर्चाएं ये भी फैलेंगी की कहीं ऐसा न हो की भविष्य में पूरा आरक्षण ही आर्थिक आधार पर हो जाए.ऐसे में मोदी सरकार के इस फैसले ने विपक्ष को एक बड़ी पशोपेश में डाल दिया है.

हालांकि अभी जो हालात दिख रहे हैं उनमें चुनाव होने में 100 से भी कम दिन बचे हैं.और लोकसभा और राज्यसभा में सरकार के पास दो तिहाई बहुमत नहीं है.ऐसे में कहीं न कहीं फैसले का मकसद चुनाव से पहले सवर्ण जातियों को ये संदेश देने का लगता है की आज भी उनकी हितैषी सिर्फ बीजेपी ही है.