बीती 17 जुलाई को यूपी दो बड़ी आपाराधिक वारदातों से दहल गया. एक तरफ जहां भूमि विवाद में सोनभद्र में 11 लोगों की हत्या हो गई वहीं संभल में कानून के रक्षक ही अपराधियों की गोलियों का शिकार बन गए. कानून व्यवस्था यूपी में बड़ा मुद्दा रहा है. मुलायम सिंह यादव खुद इस मुद्दे पर चुनाव हारे हैं तो मायावती इसी की बदौलत सत्ता में वापस भी लौटी हैं लेकिन योगी जी की मंशा क्या है ? वो यूपी में निवेश लाने की बात करते हैं लेकिन अगर अपराध इसी तरह हावी रहा तो भला कैसे निवेश आएगा और कैसे यूपी का विकास होगा ? यूपी में फिलहाल कुछ नहीं दिख रहा,न तो सरकारी दफ्तरों में घूस लेने का चलन गया, न ही अपराध रूके और न ही निवेश आया. तो सवाल उठता है कि क्या यूपी को नहीं संभाल पा रहे हैं योगी ?

यूपी में रोज सुनने में दो तरह की खबरें ही आती हैं. एक एनकाउंटर जिसमें रोज ही बदमाश घायल होते हैं और गिरफ्तार किए जाते हैं, दूसरी खबरें संभल और सोनभद्र जैसे अपराधों की आती हैं. अखिलेश यादव के वक्त में इनमें से अपराध वाली खबरें खूब आती थीं. एनकाउंटर की खबरें कभी कभी ही सामने आती थीं. अब एनकाउंटर हो रहे हैं लेकिन अपराध पर लगाम नहीं लग रहा. कुल मिलाकर अपराधियों का इकबाल तब भी बुलंद था और आज भी बुलंद है. सवाल उठता है कि क्यों योगी जी कानून व्यवस्था पर इतना जोर देने के बाद भी इसे संभाल क्यों नहीं पा रहे ?

इस सवाल को समझने के लिए यूपी की एक घटना का जिक्र करना होगा. हरदोई की संडीला तहसील में बीती 16 मई को स्कूल से लौटते वक्त एक 15 साल की लड़की के साथ गैंगरेप होता है. जब लड़की पुलिस के पास शिकायत लेकर जाती है तो उससे कहा जाता है कि तुम झूठ बोल रही हो. वारदात के दो महीने बाद किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होती है. गिरफ्तारी की बात तो छोड़िए एफआईआर भी एसपी के आदेश पर लिखी जाती है. एफआईआर दर्ज होने के बावजूद गिरफ्तारी नहीं होती है. जब पीड़ित डीजीपी के पास जाती है तो उनके सवाल पूछने पर सीओ उन्हें भी मनचाही जानकारी दे देता है और वो भी शांति से बैठ जाते हैं. कानून कहता है कि प़ॉक्सो एक्ट के तहत पीड़िता का बयान और एफआईआर ही गिरफ्तारी के लिए काफी है लेकिन यहां पुलिस आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए पीड़िता से लगातार सबूत की मांग कर रही है. सवाल ये है कि अपराध हुआ या नहीं ये तय करने का काम कोर्ट का है या पुलिस का ? पुलिस खुद से कैसे किसी को क्लीन चिट दे सकती है ? वेब पोर्टल गांव कनेक्शन ने इस खबर को प्रमुखता से उठाया. ट्विटर पर कई हस्तियों ने इसे रीट्वीट किया और फिर एक आरोपी की गिरफ्तारी हो गई. सवाल फिर खड़ा होता है कि जिस पुलिस को 2 महीने से जो सबूत नहीं मिल रहे थे वो आखिर 2 दिन में उसे कैसे मिल गए ?

इस पूरी कहानी के जरिए हम आपको बताना चाहते हैं कि पुलिस का रवैया क्या है. ये वही रवैया है जो अखिलेश सरकार के वक्त में हुआ करता था. पीड़ित पर ही सवाल खड़े करना, ढंग से जांच न करना, पुलिस ये काम तब भी करती थी और अब भी कर रही है. बस अब उन्हें योगी जी का संदेश सुनाई पड़ता है कि एनकाउंटर करना है तो रोज अपना टारगेट सा पूरा करने के लिए एनकाउंटर किए जाते हैं. सोनभद्र में भी पुलिस को गांव में तनाव होने की जानकारी पहले से थी लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई और इतना बड़ा कांड हो गया. ये सही है कि वजह जो भी हो लेकिन मीडिया ने न तो ढंग से संभल पर सवाल पूछा और न ही सोनभद्र पर लेकिन आखिर बीतती जनता पर ही है और वही वक्त पर सबका फैसला भी करेगी.

बीते साल विधायक कुलदीप सेंगर के मामले में भी पुलिस और प्रशासन की लापरवाही और पक्षपातपूर्ण रवैया सामने आया था. कह सकते हैं कि वो सत्ताधारी दल के विधायक का का मामला था तो पुलिस ने दबाव में आकर काम किया लेकिन यहां पुलिस का हाल लगभग हर मामले में एक जैसा ही है. यही वजह है कि न तो यूपी में बेटियों-बच्चियों से रेप रूक रहे हैं और न ही लोगों की हत्याएं रूक रही हैं. हालत ये है कि अब तो पुलिसकर्मी भी निशाना बन रहे हैं.

योगी जी निवेशकों का बड़ा सम्मेलन कर चुके हैं. वो लगातार निवेश लाने की बात कर रहे हैं लेकिन ऐसे माहौल में जहां पुलिसकर्मी ही मारे जा रहे हों भला कोई निवेशक अपनी और अपने कर्मचारियों की जान खतरे में डालना क्यों पसंद करेगा. यूपी-बिहार की छवि अपराध के मामले में वैसे भी खराब थी. मायावती के शासन को यूपी में अपराध के मामले में बेहतर माना जाता है. मायावती पर भले ही भ्रष्टचार को लेकर सवाल खड़े हों लेकिन उन्होंने अपराध करने वाले पर तुरंत कार्रवाई की चाहें वो मंत्री ही क्यों न हों ? ?योगी जी को चाहिए कि भले ही सार्वजनिक रूप से मायावती की बुराई करें लेकिन उनके उस रवैये को अपने व्यवहार में शामिल करें. पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय हो और अपराध पर लगाम लगे. भले ही यूपी में बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया हो लेकिन रोज होते अपराधों को देखकर एक बात तो साफ है कि योगी जी अभी भी यूपी को संभाल नहीं पा रहे हैं.