बीते दिनों बिहार चुनाव के नतीजे सामने आए. 70 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस महज 20 सीटों पर सिमट गई. महागठबंधन में सिर्फ 29 सीटों पर चुनाव लड़ने वाले वामपंथी दल 16 सीटें लाने में कामयाब रहे. आरजेडी ने 144 सीटों पर चुनाव लड़ा और 75 सीटों पर जीत हासिल की. हालांकि, कथित लहर का दावा करने वाले RJD की भी 5 सीटें 2015 के मुकाबले घट गईं. RJD ने 2015 में 80 सीटें जीती थीं, जबकि तब पार्टी महज 101 सीटों पर चुनाव लड़ी. महागठबंधन की हार की मुख्य वजह कांग्रेस का खराब प्रदर्शन माना गया जबकि RJD के तेजस्वी यादव को हार के बावजूद मैन ऑफ द मैच जैसी उपाधि से नवाजा गया.

बिहार की हार के बाद एक बार फिर कांग्रेस में फूट पड़ गई वहीं आरजेडी नेता शिवानंद तिवारी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर बड़े आरोप लगाए. शिवानंद तिवारी ने कहा कि चुनाव के दौरान राहुल और प्रियंका शिमला में छुट्टियां मना रहे थे. इसके बाद कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि शायद कांग्रेस नेतृत्व ने हार को ही अपनी नियति मान लिया है. कांग्रेस पार्टी हार रही है, कांग्रेस ने नेतृत्व परिवर्तन नहीं हो रहा, यह सभी चिंताएं जायज हैं लेकिन बिहार में पार्टी की हार की वजह से ही महागठबंधन हारा इसकी समीक्षा तो खुद पार्टी को ढंग से करनी चाहिए. 2015 में कांग्रेस 41 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और 27 सीटों पर चुनाव जीती थी. 2020 में पार्टी 70 सीटों पर चुनाव लड़ी और कुल 20 सीटें जीत सकी. यानि ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने के बाद भी कांग्रेस की 7 सीटें कम हो गईं. फिर भी गठबंझन में सफलता की जिम्मेदारी सबसे बड़े दल के ऊपर होती है. आरजेडी ने अपने उसी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए 144 सीटों पर चुनाव लड़ा और 2015 के मुकाबले उसकी 5 सीटें घट गईं.

महागठबंधन की रैलियों में तेजस्वी यादव की रैलियों में भारी भीड़ उमड़ रही थी. ऐसे में लोगों ने कहा कि बिहार में तेजस्वी लहर है. एग्जिट पोल में भी महागठबंधन की सरकार बनने का दावा किया जाने लगा. इस बड़ी लहर के बावजूद तेजस्वी की पार्टी की 2015 के मुकाबले ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़कर भी 5 सीटें गंवा बैठी. अभी RJD बिहार में सबसे बड़ा दल है लेकिन उसके मुकाबले कम सीटों पर चुनाव लड़ने वाली बीजेपी की 2015 के मुकाबले सीटें बढ़ीं और उसकी RJD से महज एक सीट कम यानि 74 सीटें आईं. देखा जाए तो बिहार में फायदा सिर्फ बीजेपी को हुआ है, बाकी सभी दलों की हालत खराब हुई है.

बिहार में समूचे महागठबंधन की हालत खराब हुई है. इसमें वामपंथी दलों का प्रदर्शन बस अच्छा रहा है. बाकी कांग्रेस और आरजेडी दोनों को अपने अंदर झांकने की ज़रूरत है. आरजेडी को चाहिए कि बेवजह 'फील गुड' करने के या कांग्रेस पर दोष मढ़ने के पार्टी आत्ममंथन करे क्योंकि पार्टी का खुद का प्रदर्शन भी खराब रहा है. दूसरी तरफ कांग्रेस को वाकई सोचना चाहिए कि क्या वजह है कि पार्टी लगातार चुनाव हार रही है और पार्टी का नेतृत्व फिर भी वही बना हुआ है.