भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव इन दिनों चरम पर है.फिलहाल भारत पाकिस्तान की सीमा में घुसकर जैश ए मोहम्मद के आतंकियों का सफाया कर चुका है.इसके बाद सीमा पर तनाव के बीच पाकिस्तान ने भारत के एक मिग-21 विमान को गिराने का दावा किया.फिलहाल उन्होंने एक भारतीय पायलट को गिरफ्तार करने का दावा किया है.भारत ने भी एक पायलट के लापता होने की बात स्वाकारी है.इन सबके बीच पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने भारत से बातचीत की पेशकश की है.इस सब घटनाक्रम में बहुत कुछ बदला है.जो पहले नहीं हुआ इस बार वो हो रहा है.

1.बातचीत में कश्मीर का नाम न लेना-दोनों देशों में तनाव के बीच पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने भारत सरकार से बातचीत की पेशकश की.अभी तक दोनों देशों के बीच जब जब बातचीत की बात आती थी तब तब पाकिस्तान की ओर से कश्मीर का राग अलापा जाता था.जब इमरान खान ने इस बार बातचीत के लिए प्रस्ताव रखा तो उसमें कश्मीर का कोई जिक्र नहीं था बल्कि आतंकवाद के मुद्दे पर बातचीत का प्रस्ताव था.भारत अभी तक यहीं मांग करता रहा है.हालांकि सवाल बड़ा है पाकिस्तान में बातचीत करें तो किससे इमरान खान से या आर्मी से ?

2.दुनिया का एक स्वर में पाकिस्तान के खिलाफ खड़ा होना-पाकिस्तान में भारत के हमले के बाद दुनिया भर ने इस बात को स्वीकार किया की भारत ने पाकिस्तान में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की है.चीन जैसे पाकिस्तान के सहयोगी ने भी भारत के विरोध में बयान नहीं दिया.बल्कि दोनों देशों से शांति की अपील की.अमेरिका ने भी पाकिस्तान से आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है.ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है.यूरोपीय यूनियन ने भी पाकिस्तान को लताड़ लगाई है.रूस ने भी पाकिस्तान को राहत देने वाली बात नहीं कही है.खास बात ये है की बीते कुछ समय से रूस पाकिस्तान के करीब जाता दिख रहा था.इस्लामिक देशों के संगठन OIC ने जिस तरह सुषमा स्वराज को विशिष्ट अतिथि का दर्जा दिया है उससे पाकिस्तान अपनों के बीच ही अलग थलग पड़ता दिख रहा है.विदेश नीति के मोर्चे पर भारत को जो जरूरत था वो उसमें सफल रहा है.

3.पाकिस्तान के अंदर घुसकर हमला-कारगिल की लड़ाई में भी भारत ने पाकिस्तान की सीमा में जाकर हमला नहीं किया था.1971 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के अंदर जाकर कार्रवाई की है.भारतीय वायुसेना के मिराज विमानों ने बालाकोट में इस कार्रवाई को अंजाम दिया.भारतीयु वायुसेना के हमले में बड़ी संख्या में आतंकियों के मारे जाने की खबर है.

4आखिरी तथ्य भारत की अंदरूनी राजनीति पर आधारित है.पिछली स्ट्राइक के बाद ही भारत में राजनीतिक दलों ने सबूत मांगे थे.बहुत से बुद्धिजीवी भी इस काम में आगे थे लेकिन पिछली बार जनता की प्रतिक्रिया को इन्होंने समझा.जब इस बार भारत ने हमला किया तो भारत में इसका सभी ने स्वागत किया.कांग्रेस ने सरकार के साथ इस मुद्दे पर खड़ा होने की बात की है.भारतीय वायुसेना को उन्होंने भी धन्यवाद भी कहा.देश के अंदर भी ये बड़ा परिवर्तन है.