2019 में देश में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं. चुनाव की तैयारियों के लिहाज से वक्त बेहद कम है.करीब करीब सारे दल अपनी अपनी संभावनाओं,गठबंधन पर विचार कर रहे हैं. संयुक्त विपक्ष के नाम पर एक जमघट कर्नाटक में सीएम के शपथग्रहण के मौके पर भी लग चुका है. इन सबके बीच एक आदमी है जो पूरे परिदृश्य में एकदम अलग है.वो किसी से बातचीत नहीं कर रहा,न वो बीजेपी के साथ है और न ही कांग्रेस के लेकिन बीजेपी से उसे खतरा जरूर है.दरअसल हम बात कर रहे हैं ओडिसा के सीएम और बीजू जनता दल के अध्यक्ष नवीन पटनायक के बारे में.जो आदमी मीडिया में न ज्यादा आता हो और न ही नेताओं से ज्यादा मिलता हो उसके बारे में क्या कहा जा सकता है.

4 बार ओडिसा के सीएम चुने जा चुके नवीन के बारे में कहा जाता है कि वो अपने राज्य की मातृभाषा को ठीक से नहीं जानते. वो ओडिया बोलने और लिखने दोनों में कमजोर हैं लेकिन सत्ता पर पकड़ की बात करें तो हाल ये है कि वो हर बार पिछले चुनाव से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज करते हैं. नवीन पटनायक और बीजेपी पुराने सहयोगी रहे हैं.2009 में दोनों पार्टियों का गठबंधन टूट गया. आमतौर पर गठबंधन टूटते हैं तो नए बनते भी हैं लेकिन ओडिसा में ऐसा नहीं हुआ. वहां सारे अलग अलग ही रहे. बीजेपी ने बहुत कोशिश की कि वो नवीन को उनके गढ़ में परास्त कर सकें लेकिन वो ऐसा कभी नहीं कर सके.यहां तक कि 2014 चुनाव की मोदी लहर भी नवीन का कुछ बिगाड़ नहीं सकीं लेकिन 2019 आते आते स्थिति में काफी कुछ बदलाव हो चुका है.
धर्मेंद्र प्रधान को आगे रखकर बीजेपी अपने पुराने सहयोगी पर हमला करने में कोई कोताही नहीं बरत रही है.चर्चाएं तो इस बात की भी हैं कि पीएम मोदी 2019 में पुरी से लोकसभा चुनाव भी लड़ सकते हैं.बीजेपी की नीति इस बार ओडिसा में सरकार बनाने पर पूरा जोर लगाने की है ऐसे में नवीन क्या करेंगे.उनके पास एक रास्ता है कि वो कांग्रेस से हाथ मिला लें और गठबंधन करके बीजेपी को पस्त करें.2015 में बिहार में नीतीश कुमार ने कुछ ऐसा ही किया था.दूसरा रास्ता है कि वो अकेले ही मैदान में बीजेपी से भिड़ जाएं जैसा कि वो हमेशा करते रहे हैं.तीसरा ये कि वो बीजेपी से ही गठबंधन कर लें

अगर कांग्रेस से गठबंधन की बात करें तो अभी तक वैसी पहल कहीं दिखती नहीं.वर्ना कर्नाटक में विपक्ष के शक्ति प्रदर्शन में भला जाने का मौका पटनायक क्यों छोड़ते. बीजेपी से भी तालमेल कहीं दिखता नहीं. ऐसे में एक रास्ता दिख रहा है जो शायद पटनायक एक बार फिर से अकेले भिड़ेंगे. बीते पंचायत चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन ओडिसा में बीजेडी के लिए खतरे की घंटी बजा चुका है. हालांकि उसके बाद पटनायक ने कई कदम उठाए ताकि उनकी लोकप्रियता बनी रह सके.

फिलहाल ऐसा बिल्कुल भी नहीं दिखता कि नवीन किसी भी तरह के गठबंधन के लिए प्रयास कर रहे हैं.वो ओडिसा में रहकर ही अपना काम कर रहे हैं.ये तो वक्त ही बताएगा की नवीन क्या करते हैं लेकिन फिलहाल उनमें वो आत्मविश्वास दिख रहा है जो एक राज्य की 4 बार सत्ता संभालने वाले व्यक्ति में होना चाहिए.