गाजियाबाद की एक कालोनी सिसकियों से भरी हुई है. किसी के सिर से पिता का साया उठ चुका है, तो किसी का बेटा दुनिया को छोड़कर जा चुका है. छोटे-छोटे घरों के बाहर लोगों की लाशें रखी हुईं हैं. मौत का ऐसा भयावह मंजर, गाजियाबाद की उस कालोनी का है जहां रोजी रोटी के लिए, रोज जद्दोजहद करने वाले लोग रहते हैं. टीवी 9 भारतवर्ष की रिपोर्ट कहती है कि इस कालोनी के हर दूसरे घर में एक की मौत हुई है. कुल 27 लोग, इस सिस्टम के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुके हैं. करीब 38 लोग घायल हैं.

बीते रविवार को गाजियाबाद के मुरादनगर में श्मशान घाट में एक छत गिरने से यह हादसा हुआ. 70 साल के एक शख्स की अंत्येष्टि में गए लोग, बारिश से बचने के लिए लोग इस छत के नीचे खड़े होने गए थे लेकिन उन्हें नहीं पता था कि यह छत ही उनकी मौत बनने वाली है. श्मशान घाट वो जगह है जहां पर जीवन के अंत में सभी को जाना है लेकिन श्मशान घाट पर छत बनाने वाले शायद इस बात को भूल गए. लोगों का कहना है कि छत को बनाने में रेत का इस्तेमाल ज़्यादा हुआ, नतीजा यह हुआ कि छत गिर गई और 27 लोगों की जान चली गई.

2017 में कर्नाटक चुनाव का नतीजा आया. बीजेपी सबसे बड़े दल के तौर पर उभर चुकी थी. सरकार और सरकार समर्थक खुश थे. तभी शाम को एक खबर आती है कि पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में एक पुल गिर गया है. उस हादसे में 18 लोगों की मौत हो गई थी. बनारस में पुल था, मुरादनगर में छत. मरने वालों का आंकड़ा वहां 18 था यहां 27 लेकिन दोनों हादसों में एक चीज़ समान है और वो है सरकारी लापरवाही. 3 साल के अंदर भी कुछ नहीं बदला है. पीएम मोदी 3 साल से बनारस के सांसद थे फिर भी वहां पुल बनाने में लापरवाही हुई. ऐसा लगता है कि सरकारी अधिकारियों, ठेकेदारों में किसी तरह का डर ही नहीं है. भगवान से तो खैर ये लोग कभी डरे नहीं लेकिन सरकारी डंडे का डर भी इन लोगों को बिल्कुल नहीं है.

इस सबके बाद सरकारी बेशर्मी का आलम यह है कि हजार करोड़ से नीचे की योजनाओं का ऐलान न करने वाली सरकार, मृतकों के परिजनों के लिए 2-2 लाख के मुआवजे का ऐलान करती है. न तो मीडिया की तरफ़ से इस पर ज्यादा सवाल खड़े किए और न ही किसानों को न्याय दिलाने वाले लोगों ने उधर ध्यान दिया. नतीजा यह हुआ कि लोगों को अपनों की लाशें लेकर हाईवे जाम करना पड़ा. जब हाईवे पर गाडियों की लंबी लाइन लग गई तो मजबूरी में सरकार को इनकी मांगों के सामने झुकना पड़ा. कुल मिलाकर श्मशान घाट पर असमय मौत का शिकार होने वाले लोगों को सही समय पर अंतिम संस्कार भी नसीब नहीं हुआ.

मुरादनगर के प्रकरण में 3 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. गिरफ्तारी किन धाराओं में हुई है इसका पता नहीं है. जिस तरह का कृत्य है उसे देखते हुए तो हत्या का मुकदमा होना चाहिए. दूसरे, घोटाले की भी एक प्रक्रिया होती है. योगी जी इस सिस्टम में पुराने हैं. सबको पता रहता है कि पोस्ट के हिसाब से हिस्सा बांटा जाता है. जो बचता है वो काम भी लगाया जाता है. यह तय है कि योगी जी इसे रोक नहीं सकते लेकिन कम से कम इतना कर दें कि इस तरह छतें गिरना बंद हो जाएं और लोगों की जानें तो न जाएं.