बाल विवाह समाज की एक बड़ी बुराई है.ये महिलाओं के विकास और सशक्तिकरण के खिलाफ है.बाल विवाह से जुड़ा एक नया सर्वे आया है.इस सर्वे के मुताबिक पश्चिम बंगाल अभी भी इस बीमारी से बुरी तरह प्रभावित है.हालांकि उत्तर प्रदेश ने इस मामले में अहम सुधार किया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपे राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 की 2015-16 की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल के बाद त्रिपुरा बाल विवाह से सबसे ज्यादा प्रभावित प्रदेशों की सूची में दूसरे स्थान पर है.पिछड़े राज्यों के तौर पर पहचान रखने वाले राज्यों बिहार,झारखंड और यूपी में अहम सुधार आया है.इन राज्यों में बाल विवाह के मामले में 20 फीसदी की गिरावट आई है.खास बात ये है की 2005-06 के सर्वे में इस सूची में बिहार सबसे आगे था.जबकि पश्चिम बंगाल चौथे स्थान पर था.बाल विवाह के लिए कुख्यात राज्य राजस्थान में काफी सुधार है और यहां बाल विवाह के मामलों में 20 फीसदी तक की कमी देखी गई है.

अगर जिलों की संख्या के आधार पर बाल विवाह में कमी की बात की जाए तो बिहार आज भी नंबर एक है.यहां 20 जिलों में बाल विवाह अभी प्रचलित है.इसके बाद पश्चिम बंगाल का नंबर आता है जहां 14 जिले बाल विवाह से प्रभावित हैं वहीं राजस्थान में 11 जिले बाल विवाह की कुप्रथा से प्रभावित है.बाल विवाह के मामलों की संख्या के आधार पर पश्चिम बंगाल का मुर्शिदाबादा सबसे ज्यादा प्रभावित जिला है.यहां बाल विवाह के 39 फीसदी मामले सामने आते हैं.मुर्शिदाबाद के बाद गुजरात का गांधीनगर और राजस्थान के भीलवाड़ा क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर है.