चीन की धूर्तता से भरी एक और मांग के बाद दोनों देशों के बीच एक और बैठक बेनतीजा खत्म हो गई. दरअसल चीन अपनी कूटनीतिक चाल से भारत को उसी की सीमा से पीछे धकेलना चाहता है, भारत ने चीन की इस नाजायज मांग को ठुकरा दिया, जिसके बाद बैठक में एक बार फिर विवाद का कोई हल नहीं निकल पाया.

दरअसल चीन इस समय फिंगर 4 तक बढ़कर आगे आ चुका है. जबकि भारत फिंगर 8 तक पेट्रोलिंग करता रहा है. चीन की मांग है कि दोनों देश बराबर की जगह खाली करके वापस लौटें. चूंकि चीन ने घुसपैठ की है ऐसे में चीन का पीछे जाना तो ठीक है लेकिन भारत अगर पीछे जाता है तो वो अपनी ही जगह को खाली कर देगा. ऐसे में इस पूरे विवाद में भारत की ये बड़ी हार होगी.

एएलसी की स्थिति के हिसाब से देखें तो चीन फिंगर 4 से फिंगर 8 पर चला जाए (जो भारत की मांग भी है) लेकिन भारत भी फिंगर 1 से पीछे चला जाए, जबकि भारत फिंगर 8 तक पट्रोलिंग करता रहा है. इस हाल में भारत फिंगर 1 तक ही सीमित रह जाएगा. चीन अपनी इस चाल के जरिए एलएसी के पूरे सीमा निर्धारण को बिल्कुल ही बदलना चाहता है, जिसे भारत ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है.

अभी चीनी सेना पैंगोंग झील के पास फिंगर 5 के आसपास कब्जा जमाए है और उन्होंने फिंगर 5 से फिंगर 8 तक पांच किलोमीटर से ज्यादा की दूरी में बड़ी संख्या में चीनी सैनिक और उपकरण तैनात किए हैं. भारत हमेशा से मांग करता रहा है कि चीन को वापस अपने क्षेत्र में लौट जाना चाहिए लेकिन चीन अपनी चालबाजियों से बाज नहीं आ रहा है.

आपको बता दें कि चीन के साथ सीमा विवाद खूनी संघर्ष में भी बदल चुका है. बीती 15 जून को गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच तनाव हिंसक झड़प में बदल गया था, इस झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे. बड़ी संख्या में चीन के सैनिक भी इस झड़प में मारे गए थे. हालांकि अपने दोस्त पाकिस्तान की तरह चीन ने भी आज तक मारे गए सैनिकों की संख्या नहीं बताई है. अमेरिकी खुफिया एजेंसी के मुताबिक चीन के 35 से ज़्यादा जवान इस झड़प में मारे गए थे.